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Bharat Tiwari Encounter: एनकाउंटर पर उठ रहे सवाल, पीड़ितों की लड़ाई से पुलिस मुठभेड़ तक, चर्चा में आया मामला

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Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर जिले में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत तिवारी का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग भरत तिवारी को कटाव पीड़ितों के हक के लिए लड़ने वाला व्यक्ति बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग कानून और व्यवस्था के नजरिए से इस पूरे मामले को देख रहे हैं। इस घटना के बाद प्रशासन की कार्यशैली, पुनर्वास व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है।

कटाव पीड़ितों के लिए उठा रहे थे आवाज

सोशल मीडिया पर वायरल दावों के मुताबिक, भरत तिवारी जवइनिया गांव के उन लोगों के लिए आवाज उठा रहा था, जो नदी कटाव से प्रभावित हुए थे। बताया जा रहा है कि प्रशासन ने इन लोगों के पुनर्वास के लिए बिलौटी गांव के पास जमीन आवंटित की थी। हालांकि, उस जमीन में गहरे गड्ढे होने की बात कही जा रही थी। दावा है कि भरत तिवारी लगातार मांग कर रहा था कि वहां रहने योग्य व्यवस्था बनाने के लिए 8 से 10 फीट तक मिट्टी भरवाई जाए। लेकिन जब उसकी मांग पूरी नहीं हुई, तो मामला धीरे-धीरे प्रशासन और भरत के बीच टकराव की स्थिति तक पहुंच गया।

सोशल मीडिया पर भी थे सक्रिय

बताया जाता है कि भरत तिवारी पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय था। वह फेसबुक लाइव के जरिए अपनी बातें लोगों तक पहुंचाता था और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाता था। सोशल मीडिया पर वायरल कुछ दावों में यह भी कहा गया कि वह लाइव वीडियो के दौरान हथियार दिखाते हुए अधिकारियों के खिलाफ बयान देता था। हालांकि, इन दावों की अलग-अलग स्तर पर जांच और पुष्टि का विषय बना हुआ है।

कैसे हुई पुलिस मुठभेड़?

जानकारी के अनुसार, 17 जून को शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के खेतों में पुलिस और एसटीएफ की टीम भरत तिवारी को पकड़ने पहुंची थी। इसी दौरान मुठभेड़ हुई। पुलिस का कहना है कि भरत को चारों तरफ से घेर लिया गया था। दावा किया गया कि उसने पहले आत्मसमर्पण करने जैसा व्यवहार किया और अपनी पिस्तौल कुछ दूरी पर फेंक दी। लेकिन जैसे ही पुलिसकर्मी हथियार उठाने आगे बढ़े, उसने दोबारा पिस्तौल उठा ली। पुलिस के मुताबिक, इसके बाद भरत ने फायरिंग की, जिसमें एक गोली पुलिस वाहन के बोनट पर लगी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने गोली चलाई, जिससे उसकी मौत हो गई। इस मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार के बयान के आधार पर नई एफआईआर भी दर्ज की गई है।

परिवार पर भी हुई कानूनी कार्रवाई

एनकाउंटर के बाद पुलिस ने भरत तिवारी के परिवार के खिलाफ भी कार्रवाई की है। पुलिस का आरोप है कि घर में अवैध हथियार छिपाकर रखे गए थे। इसी मामले में भरत के पिता काशी नाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। वहीं, भरत तिवारी की मौत के बाद यह मामला बिहार की राजनीति और सामाजिक चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

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