Prayagraj News: अवैध पुलिस हिरासत पर हाईकोर्ट सख्त, अधिकारी से वसूली कर पीड़ित को ₹25 हजार मुआवजा देने का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को 24 घंटे तक अवैध रूप से हिरासत में रखने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को 25 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। अदालत ने पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर टिप्पणी की।

Illegal Detention: प्रयागराज में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में एक व्यक्ति को 24 घंटे तक अवैध रूप से पुलिस हिरासत में रखने को कानून के खिलाफ माना है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को पीड़ित व्यक्ति को 25 हजार रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी कहा है कि यदि सरकार चाहे तो यह रकम संबंधित पुलिस अधिकारी के वेतन से वसूल सकती है।

याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणी

यह फैसला मातांबर मिश्रा की ओर से दाखिल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया। न्यायमूर्ति जे. जे. मुनीर और न्यायमूर्ति संजय कुमार की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों से साफ है कि संबंधित पुलिस अधिकारी ने याचिकाकर्ता को उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित किया था।

पीठ ने माना कि किसी भी नागरिक की आजादी और मौलिक अधिकारों का सम्मान किया जाना जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को बिना कानूनी आधार के हिरासत में रखा जाता है, तो यह उसके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा।

2022 की घटना पर दिया गया फैसला

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि 26 नवंबर से 27 नवंबर, 2022 के बीच याचिकाकर्ता को गैरकानूनी तरीके से पुलिस हिरासत में रखा गया था। इस वजह से न्याय के हित में पीड़ित को 25 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार चाहे तो इस राशि की वसूली तत्कालीन बरौत चौकी प्रभारी सूर्य प्रकाश दुबे से कर सकती है, जो उस समय मामले से जुड़े अधिकारी थे।

पुलिस व्यवस्था पर अदालत की नाराजगी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली पर भी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि कई बार अधिकारी यह सोचकर नियमों का उल्लंघन कर बैठते हैं कि ऐसे मामलों में बहुत कम लोग अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं। पीठ ने टिप्पणी की कि अधिकारियों को लगता है कि हजारों मामलों में से शायद ही कोई व्यक्ति न्याय की मांग करेगा और उन्हें जवाबदेह ठहराएगा। इसी सोच के कारण कई बार नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन होता है।

जवाबी हलफनामे में नहीं किया गया खंडन

अदालत ने यह भी नोट किया कि पुलिस अधिकारियों की ओर से दाखिल जवाबी हलफनामे में अवैध हिरासत के आरोपों का स्पष्ट रूप से खंडन नहीं किया गया। इससे याचिकाकर्ता के आरोपों को और मजबूती मिली।

अधिकारियों को भेजी जाएगी आदेश की प्रति

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि इस फैसले की प्रति अपर मुख्य सचिव (गृह), पुलिस आयुक्त प्रयागराज, सहायक पुलिस आयुक्त हंडिया और तत्कालीन बरौत चौकी प्रभारी सूर्य प्रकाश दुबे को भेजी जाए, ताकि आदेश का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

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