High Court Justice Shekhar Yadav: इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस शेखर कुमार यादव की बेंच को बदल दिया गया है, जिन्हें हाल ही में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर विवादों का सामना करना पड़ा था। 8 दिसंबर को जस्टिस यादव ने वीएचपी के कार्यक्रम में भारत के बहुसंख्यक समुदाय की इच्छा के अनुरूप कार्य करने की बात कही थी, जिसके बाद विपक्षी दलों ने उनकी टिप्पणी की निंदा की थी। अब जस्टिस यादव को 16 दिसंबर से नए रोस्टर के तहत सुनवाई करने के लिए क्षेत्राधिकार में बदलाव किया गया है।
बेंच का बदलाव और क्षेत्राधिकार में परिवर्तन
इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के आदेश पर कई न्यायाधीशों की बेंच बदली गई है। Justice Shekhar Yadav अब 2010 तक की फर्स्ट अपीलों की सुनवाई करेंगे। इससे पहले वे क्रिमिनल मामलों की बेंच में शामिल थे। इसके अलावा, जस्टिस समित गोपाल, जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र और जस्टिस संजय कुमार सिंह की बेंच भी बदली गई है। इन सभी न्यायाधीशों के क्षेत्राधिकार में यह बदलाव हाई कोर्ट के सप्लीमेंट्री रोस्टर के तहत किया गया है। यह बदलाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है और 16 दिसंबर से लागू होगा।
Justice Shekhar Yadav का 8 दिसंबर को वीएचपी के कार्यक्रम में दिया गया बयान चर्चा का केंद्र बना था। उन्होंने कहा था कि भारत अब बहुसंख्यक समुदाय की इच्छा के अनुसार काम करेगा और जल्द ही समान नागरिक संहिता लागू होगी। इस बयान को लेकर विपक्षी दलों ने कड़ी आलोचना की थी। कई नेताओं का कहना था कि जज का यह बयान संविधान की धाराओं के खिलाफ है और उन्हें राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए।
महाभियोग की संभावना
Justice Shekhar Yadav के बयान के बाद विपक्षी सांसदों ने उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। श्रीनगर से नेशनल कांफ्रेंस के सांसद आगा सईद रुहुल्लाह मेहदी ने दावा किया कि कई विपक्षी दलों के सांसद जस्टिस यादव के खिलाफ महाभियोग नोटिस का समर्थन करने को तैयार हैं। संविधान के तहत, एक न्यायाधीश को हटाने के लिए संसद में महाभियोग प्रस्ताव पारित करना होता है, जिसके लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है।