Drug Free Campaign: प्रदेश में युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए सरकार अब और सख्त कदम उठाने जा रही है। छात्रावासों, विश्वविद्यालयों और कॉलेज परिसरों में आकस्मिक जांच अभियान चलाए जाएंगे। साथ ही रैपिड टेस्ट किट के माध्यम से संदिग्ध मामलों की जांच भी कराई जाएगी।
यह निर्देश नारकोटिक्स कंट्रोल एवं समन्वय तंत्र (एनकार्ड) की दूसरी बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी) Deepak Kumar ने दिए। उन्होंने अधिकारियों को मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई करने और दोषियों की अवैध संपत्तियों को जब्त करने के निर्देश भी दिए।
हॉटस्पॉट क्षेत्रों पर रहेगी विशेष निगरानी
बैठक में एपीसी ने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री से जुड़े चिन्हित हॉटस्पॉट क्षेत्रों की नियमित निगरानी की जानी चाहिए। उन्होंने अधिकतम मात्रा में अवैध मादक पदार्थों की बरामदगी सुनिश्चित करने और उनके निस्तारण को निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुरूप करने पर जोर दिया।
एनडीपीएस मामलों में तेज होगी कार्रवाई
अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि NDPS Act के तहत दोषियों की अवैध संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया तेज की जाए। इसके अलावा अदालतों में लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने को भी कहा गया।
कॉलेजों और छात्रावासों में होंगे आकस्मिक परीक्षण
बैठक में युवाओं के बीच बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता जताई गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और छात्रावासों में समय-समय पर आकस्मिक परीक्षण अभियान चलाए जाएं। इसके साथ ही लोगों को राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन 1933 के बारे में जागरूक करने पर भी जोर दिया गया।
हजारों मामलों में कार्रवाई, करोड़ों की संपत्ति जब्त
बैठक में एएनटीएफ के आईजी Abdul Hamid ने बताया कि मई 2026 तक मादक पदार्थों से जुड़े 2,335 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 3,361 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान 20,578 किलोग्राम मादक पदार्थ बरामद किए गए।
उन्होंने बताया कि एएनटीएफ के गठन के बाद वर्ष 2022 से 15 जून 2026 तक कुल 3,83,333 किलोग्राम मादक पदार्थों का निस्तारण किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1,325 करोड़ रुपये है।
नशामुक्त समाज की दिशा में प्रयास
सरकार का मानना है कि केवल तस्करों पर कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना भी उतना ही जरूरी है। इसी उद्देश्य से शैक्षणिक संस्थानों में विशेष अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है, ताकि युवा पीढ़ी को नशे से दूर रखा जा सके।
