Aparna Yadav Resignation Rumors: मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू और भाजपा नेता अपर्णा यादव इन दिनों अपनी निजी और राजनीतिक जिंदगी को लेकर जबरदस्त चर्चा में हैं। हाल ही में उनके पति प्रतीक यादव द्वारा सोशल मीडिया पर तलाक की घोषणा और अपर्णा पर लगाए गए गंभीर आरोपों ने उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े सियासी परिवार और भाजपा खेमे में खलबली मचा दी है। प्रतीक ने अपर्णा को ‘स्वार्थी’ और ‘परिवार तोड़ने वाली’ बताते हुए जल्द अलग होने की बात कही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब अपर्णा पहले से ही भाजपा में अपनी अनदेखी और केजीएमयू विवाद को लेकर सुर्खियों में थीं। उनके विद्रोही तेवर पार्टी के लिए लगातार असहज स्थिति पैदा कर रहे हैं।
अपर्णा यादव: विवादों का सिलसिला और भाजपा की बढ़ती मुश्किलें
उत्तर प्रदेश की राजनीति में Aparna Yadav का नाम पिछले चार सालों से लगातार चर्चा का केंद्र रहा है। साल 2022 में समाजवादी पार्टी छोड़ भाजपा का दामन थामने वाली अपर्णा के लिए यह सफर आसान नहीं रहा। उनके हालिया पारिवारिक विवाद ने न केवल उनके निजी जीवन को सार्वजनिक पटल पर ला दिया है, बल्कि भाजपा के लिए भी नई मुसीबत खड़ी कर दी है।
तलाक की घोषणा से मची सियासी हलचल
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक यादव ने इंस्टाग्राम पर एक बेहद कड़ा पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा कि वह जल्द से जल्द Aparna Yadav से तलाक लेने जा रहे हैं। प्रतीक ने उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने उनके माता, पिता और भाई के साथ रिश्ते खराब कर दिए हैं। हालांकि, अपर्णा के करीबी सूत्रों और उनके भाई अमन बिष्ट ने इन खबरों को नकारते हुए दावा किया है कि प्रतीक का सोशल मीडिया अकाउंट हैक हो गया है।
टिकट और पद को लेकर तकरार
Aparna Yadav ने जब भाजपा ज्वाइन की थी, तब माना जा रहा था कि उन्हें लखनऊ की किसी अहम सीट से विधानसभा टिकट मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद मैनपुरी उपचुनाव और फिर 2024 लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने टिकट के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दिल्ली के बड़े नेताओं के चक्कर काटे, मगर उन्हें खाली हाथ रहना पड़ा।
पार्टी के भीतर असहजता
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महिला आयोग पद पर नाराजगी: सितंबर 2024 में जब उन्हें राज्य महिला आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया, तो उन्होंने कई दिनों तक कार्यभार नहीं संभाला। माना गया कि वह किसी बड़े पद की उम्मीद कर रही थीं।
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केजीएमयू विवाद: हाल ही में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में धर्मांतरण के मुद्दे पर वह बिना सूचना के वीसी चैंबर में घुस गईं। वहां यूनिवर्सिटी प्रशासन के साथ हुई उनकी तीखी बहस ने सरकार के लिए प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर असहजता पैदा की।
Aparna Yadav के ये कदम दर्शाते हैं कि वह अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। अब उनके पारिवारिक विवाद ने भाजपा के “पारिवारिक मूल्यों” वाले एजेंडे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।









