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Double Murder Case: गवाहों के बयान बदलने के बावजूद, हाई-प्रोफाइल केस में फोरेंसिक सबूत बने निर्णायक, MLC समेत 10 को उम्रकैद

Auraiya Double Murder Case

Verdict and Evidence : औरैया के चर्चित दोहरे हत्याकांड में MP-MLA कोर्ट ने पूर्व MLC कमलेश पाठक समेत 10 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत का फैसला केवल गवाहों की गवाही पर निर्भर नहीं रहा, बल्कि घटनास्थल से मिले वैज्ञानिक और डिजिटल सबूतों ने भी अहम भूमिका निभाई। खून से सनी मिट्टी, मृतकों के कपड़े और जूते, 24 तस्वीरें और चार वीडियो ऐसे महत्वपूर्ण साक्ष्य रहे, जिन्होंने बचाव पक्ष की दलीलों को कमजोर कर दिया।

विवाद की वजह

पूरा मामला औरैया शहर के नारायणपुर इलाके में स्थित पंचमुखी मंदिर परिसर की करीब एक बीघा जमीन से जुड़ा था। आरोप था कि पूर्व MLC कमलेश पाठक, पूर्व ब्लॉक प्रमुख संतोष पाठक और अन्य लोगों ने जमीन पर कब्जे की कोशिश की थी। वकील मंजुल चौबे ने कथित तौर पर इसका विरोध किया था। 15 मार्च 2020 को मंजुल के परिवार के लोग मंदिर में पूजा करने पहुंचे थे। इसी दौरान विवाद बढ़ गया और मामला हिंसा में बदल गया। गोलीबारी में मंजुल और उनकी चचेरी बहन सुधा की मौत हो गई।

खून से जुड़ा सबूत

घटना के बाद फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से खून से सनी मिट्टी के साथ मृतकों के खून से सने कपड़े और जूते बरामद किए। सभी नमूनों को सुरक्षित करके फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया। जांच रिपोर्ट में मिट्टी, कपड़ों और जूतों पर मिले खून के मृतकों से संबंधित होने की पुष्टि हुई। इस वैज्ञानिक साक्ष्य ने घटनास्थल और हत्या के बीच महत्वपूर्ण कड़ी स्थापित की।

वीडियो ने खोली कड़ी

मामले की जांच में स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए चार वीडियो भी सामने आए। फुटेज में घटनास्थल पर पत्थरबाजी, गोलीबारी, गाली-गलौज और लोगों को अपनी जान बचाकर भागते हुए देखा गया। एक वीडियो में गोली चलने की आवाज के बाद भीड़ को भागते हुए दिखाया गया, जबकि करीब 10 सेकंड बाद एक और गोली की आवाज रिकॉर्ड हुई। इन वीडियो से घटनाओं के क्रम को समझने में पुलिस और अभियोजन को मदद मिली।

तस्वीरों ने जोड़े सबूत

पुलिस और स्थानीय लोगों की ओर से ली गई 24 तस्वीरें भी मुकदमे में महत्वपूर्ण साक्ष्य बनीं। इनमें घटनास्थल पर खड़ी गाड़ियां और मोटरसाइकिलें, कथित रूप से बदली गई नंबर प्लेट, खून से सना फर्श, लाठियां लिए लोग और मृतकों के शवों की तस्वीरें शामिल थीं। एक तस्वीर में चश्मदीद गवाह को गोली के खाली खोल की ओर इशारा करते हुए भी देखा गया। इन तस्वीरों ने घटनास्थल की स्थिति और घटनाओं के क्रम को समझने में मदद की।

गवाह बदले बयान

पुलिस ने मामले में कुल 32 लोगों को गवाह बनाया था। इनमें पूर्व MLC का निजी सुरक्षा गार्ड भी शामिल था। हालांकि, मुकदमे के दौरान कुछ गवाह अपने पहले के बयानों से पीछे हट गए या उनके बयान बदल गए। इसके बावजूद फोरेंसिक रिपोर्ट, तस्वीरों और वीडियो जैसे स्वतंत्र साक्ष्यों ने अभियोजन के मामले को मजबूती दी। अदालत ने इन्हीं महत्वपूर्ण साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए दोषियों को सजा सुनाई।

दोषियों को उम्रकैद

MP-MLA कोर्ट के फैसले के बाद शिकायतकर्ता आशीष चौबे और उनके चचेरे भाई संजय पंचमुखी मंदिर पहुंचे। दोनों ने मंदिर में भगवान बजरंगबली की पूजा की और प्रसाद चढ़ाया। वहीं, ADG अनुपम कुलश्रेष्ठ ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को परिवार की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

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