Ram Mandir Donation Investigation Case: राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे से जुड़े मामले में इन दिनों रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और गोपाल राय के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। दोनों की भूमिका को लेकर जांच एजेंसियां जानकारी जुटा रही हैं। इसी क्रम में एसआईटी ने कुल 11 लोगों से पूछताछ की है। जांच के दौरान कुछ लोगों की संपत्ति को लेकर भी सवाल सामने आए हैं, जिनकी पड़ताल की जा रही है।
रामशंकर यादव की भूमिका पर नजर
जानकारी के अनुसार, रामशंकर यादव पेशे से ड्राइवर रहे हैं। 1980 और 1990 के दशक में वह ऑटो चलाते थे। बाद में वह अयोध्या पहुंचे और विभिन्न वाहनों को चलाने का काम करने लगे। समय के साथ उन्हें कई जिम्मेदारियां दी गईं। राम मंदिर निर्माण से जुड़े कार्यों और बाद में चढ़ावे की रकम की गिनती से जुड़े कामों में भी उनकी भागीदारी रही। जांच एजेंसियां अब उनके कार्यकाल और संपत्ति से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही हैं।
गोपाल राय भी चर्चा में
वहीं, गोपाल राय का नाम भी इस मामले में प्रमुख रूप से सामने आया है। बताया जाता है कि वह चढ़ावे की रकम की गिनती से जुड़ी व्यवस्था की निगरानी करते थे। उनके अधीन कई लोग काम करते थे, जो दान की राशि की गिनती और रिकॉर्ड तैयार करने का काम संभालते थे। जांच एजेंसियां उनकी भूमिका और पूरी प्रक्रिया को समझने का प्रयास कर रही हैं।
कई माध्यमों से आता है दान
राम मंदिर में देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से दान आता है। मंदिर परिसर में कई दान पात्र रखे गए हैं, जहां श्रद्धालु अपनी इच्छा अनुसार दान करते हैं। इसके अलावा कुछ लोग सीधे ट्रस्ट कार्यालय में जाकर दान जमा करते हैं और उसकी रसीद प्राप्त करते हैं। कई श्रद्धालु गुप्त दान भी करते हैं, जिसमें नकद राशि के साथ सोना और चांदी जैसी वस्तुएं भी शामिल होती हैं।
कैसे होती है चढ़ावे की गिनती
दान पात्रों से प्राप्त राशि को एक स्थान पर इकट्ठा किया जाता है। इसके बाद एक बड़े हॉल में बैठकर रकम की गिनती की जाती है। यह प्रक्रिया बैंक द्वारा नामित एजेंसी और ट्रस्ट के जिम्मेदार कर्मचारियों की निगरानी में पूरी की जाती है। गिनती के बाद पूरा हिसाब तैयार कर राशि बैंक में जमा कर दी जाती है। इस व्यवस्था में कई कर्मचारी और अधिकारी शामिल रहते हैं तथा समय-समय पर इसका ऑडिट भी कराया जाता है।
हजारों करोड़ का मिल चुका है दान
जानकारी के अनुसार, राम मंदिर ट्रस्ट को अब तक लगभग 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक का दान मिल चुका है। पहले ट्रस्ट की ओर से बताया गया था कि मंदिर निर्माण पर लगभग 1900 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि शेष राशि बैंक में सुरक्षित जमा है।
जांच पूरी होने का इंतजार
इस पूरे मामले में फिलहाल संबंधित पक्षों की ओर से खुलकर बयान नहीं दिए जा रहे हैं। मीडिया के सवालों पर भी लोग ज्यादा टिप्पणी करने से बच रहे हैं। हालांकि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने हाल ही में जारी एक बयान में कहा है कि मामले की जांच और ऑडिट प्रक्रिया चल रही है। उनका कहना है कि जांच पूरी होने के बाद सभी तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आ जाएंगे।
