Ayodhya Fish Feast Controversy:धर्मनगरी अयोध्या में प्रसिद्ध सिद्धपीठ श्री हनुमानगढ़ी मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के स्वागत समारोह को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कार्यक्रम से जुड़े कथित ‘मछली भोज’ का वीडियो सामने आने के बाद भाजपा और हिंदू संगठनों ने कांग्रेस पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। सावन के पवित्र महीने में रामनगरी में मछली पकाए जाने और परोसे जाने को लेकर धार्मिक आस्था और मर्यादा का मुद्दा गरमा गया है।
भाजपा का हमला
यूपी भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कथित मछली भोज का वीडियो साझा करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि श्रावण मास के दौरान भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत कार्यक्रम में मछली भोज का आयोजन बेहद निंदनीय है। भाजपा ने इसे सनातन परंपराओं, धार्मिक भावनाओं और संत समाज का अपमान बताते हुए कांग्रेस से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
सनातन पर सवाल
पंकज चौधरी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की राजनीति में हिंदू समाज की धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक मूल्यों की अनदेखी लगातार देखने को मिलती रही है। उन्होंने कहा कि सावन जैसे पवित्र महीने में अयोध्या की धार्मिक गरिमा से जुड़े आयोजन में ऐसा भोजन रखना करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। भाजपा ने इसे वोट बैंक और तुष्टीकरण की राजनीति से जोड़ते हुए कांग्रेस को घेरा और संत समाज की भावनाओं का सम्मान करने की बात कही।
दो क्विंटल मछली
जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस का स्वागत समारोह अयोध्या के तारुन क्षेत्र स्थित अर्पित लॉन में आयोजित किया गया था। दावा है कि कार्यक्रम में शामिल लोगों के लिए करीब दो क्विंटल से अधिक मछली पकाई जा रही थी। वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद स्थानीय स्तर से लेकर प्रदेश की राजनीति तक मामला तेजी से चर्चा में आ गया। हिंदू संगठनों का कहना है कि सावन में जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु और कांवड़िए व्रत व धार्मिक नियमों का पालन करते हैं, तब ऐसा आयोजन अयोध्या की धार्मिक पहचान के विपरीत है।
कांग्रेस का पक्ष
विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस से जुड़े स्थानीय नेताओं की ओर से कहा गया कि कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं और अतिथियों के लिए सामान्य भोज की व्यवस्था की गई थी। हालांकि, सावन में मछली परोसे जाने के विवाद पर कांग्रेस नेतृत्व की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इस मामले ने अयोध्या में धर्म, राजनीतिक मर्यादा और धार्मिक आस्था को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
