SDM साहब पर भड़के होमगार्ड, लगाया गाली-गलौज का आरोप लेकिन जांच में खुली पोल!

बहराइच की महसी तहसील में तैनात तीन होमगार्डों द्वारा एसडीएम आलोक प्रसाद पर लगाए गए जातिसूचक गाली-गलौज और शारीरिक उत्पीड़न के आरोप जांच में झूठे पाए गए हैं। प्रशासन ने साक्ष्यों के अभाव में इस शिकायत को पूरी तरह निराधार करार दिया है।

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Bahraich News: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ महसी तहसील में तैनात तीन होमगार्डों—राजाराम शुक्ला, रमाकान्त मिश्र और राम कुमार तिवारी—ने एसडीएम आलोक प्रसाद पर गंभीर आरोप लगाए। जवानों का दावा था कि एसडीएम ने उन्हें जातिसूचक अपशब्द कहे, उनका शारीरिक उत्पीड़न किया और यहाँ तक कि जान से मारने की धमकी भी दी। इस शिकायत ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी थी, जिसके बाद जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी के निर्देश पर विस्तृत जांच बैठाई गई। हालांकि, जांच प्रक्रिया के दौरान शिकायतकर्ता अपने आरोपों के समर्थन में कोई भी ठोस प्रमाण या तथ्य प्रस्तुत करने में विफल रहे। अंततः, तहसील कर्मचारियों और गवाहों के बयानों के आधार पर प्रशासन ने इन आरोपों को निराधार और झूठा घोषित कर दिया है।

विवाद की जड़: दिव्यांग फरियादी और संवेदनहीनता

Bahraich  घटना की शुरुआत बुधवार को हुई जब एसडीएम आलोक प्रसाद के चैंबर में एक दिव्यांग व्यक्ति अपनी फरियाद लेकर पहुँचा। एसडीएम के अनुसार, वह व्यक्ति जमीन पर घिसटते हुए आया और कुर्सी पर बैठते समय गिरते-गिरते बचा। आरोप है कि सुरक्षा में तैनात तीनों होमगार्ड पास ही बैठे तमाशा देख रहे थे और उन्होंने दिव्यांग की मदद नहीं की। इसी बात पर एसडीएम ने उन्हें फटकार लगाते हुए ‘संवेदनहीन’ कहा था।

होमगार्डों के गंभीर आरोप और आत्मदाह की चेतावनी

Bahraich  एसडीएम की फटकार के बाद तीनों होमगार्डों ने मोर्चा खोल दिया। उन्होंने जिला कमांडेंट, जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि एसडीएम ने उनसे उठक-बैठक लगवाई, गनर से उनकी फोटो खिंचवाई और उन्हें ड्यूटी स्थल से भगा दिया। होमगार्ड रमाकान्त मिश्र ने यहाँ तक कह दिया कि यदि एसडीएम को निलंबित नहीं किया गया, तो वे आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर होंगे। उन्होंने ड्यूटी के घंटों में मनमानी का भी आरोप लगाया था।

जांच रिपोर्ट में क्या निकला?

Bahraich  डीएम के आदेश पर हुई जांच में होमगार्डों के दावों की हवा निकल गई। जांच टीम ने संबंधित दिव्यांग व्यक्ति, चालक और अन्य तहसील कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। किसी भी स्वतंत्र गवाह ने गाली-गलौज या शारीरिक प्रताड़ना की पुष्टि नहीं की। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि होमगार्ड केवल अपनी लापरवाही पर मिली फटकार से नाराज थे और उन्होंने दबाव बनाने के लिए झूठी शिकायत का सहारा लिया।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि ड्यूटी पर अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह मामला अब जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है कि कैसे एक प्रशासनिक फटकार को जातिगत और व्यक्तिगत विवाद का रूप देने की कोशिश की गई।

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