BJP Surprise Picks: जितेंद्र मिश्रा से योगी तक, जब चर्चा में कोई और था, BJP ने बना दिया किसी और को बॉस

राम मंदिर के पहले CEO के तौर पर पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का नाम सामने आते ही राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। BJP में ऐसे कई फैसले रहे हैं, जहां चर्चित नामों को पीछे छोड़कर दूसरे चेहरे को जिम्मेदारी मिली।

BJP Surprise Decisions

BJP Surprise Decisions:ऑफिस में खबर लिखते समय टीवी स्क्रीन पर ब्रेकिंग फ्लैश हुई कि अयोध्या राम मंदिर के पहले CEO पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा होंगे। खबर सामने आते ही सबसे पहला सवाल यही उठा कि आखिर जितेंद्र मिश्रा कौन हैं? क्योंकि CEO पद को लेकर सार्वजनिक चर्चा में उनका नाम लगभग नजर नहीं आया था। देखते ही देखते गूगल पर उनके बारे में सर्च बढ़ने लगा और सोशल मीडिया पर भी उनकी नियुक्ति चर्चा का विषय बन गई। वजह यह थी कि इस पद के लिए रिटायर्ड IPS राजेश पांडे, रिटायर्ड IAS योगेश्वर राम मिश्रा और पूर्व IPS परेश सक्सेना जैसे नामों की चर्चा हो रही थी।

चर्चा अलग, फैसला अलग

जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर लगने के बाद BJP की राजनीति में होने वाले ऐसे फैसलों की भी चर्चा शुरू हो गई, जिनमें आखिरी समय पर तस्वीर बदल जाती है। BJP के भीतर किसी पद के लिए नाम चलना और वास्तव में उसी व्यक्ति का चयन होना दो अलग बातें मानी जाती हैं। पिछले कुछ वर्षों में मुख्यमंत्री पद से लेकर केंद्रीय मंत्रालय और संगठन से जुड़ी जिम्मेदारियों तक ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं। इन फैसलों को पार्टी की रणनीति कहें या नेतृत्व का अंतिम निर्णय, लेकिन BJP ने कई बार राजनीतिक विश्लेषकों के अनुमान को गलत साबित किया है।

खट्टर बने सरप्राइज

2014 में हरियाणा में BJP ने पहली बार अपने दम पर सरकार बनाने लायक बहुमत हासिल किया। मुख्यमंत्री पद को लेकर कई बड़े नाम चर्चा में थे, लेकिन विधायक दल की बैठक के बाद मनोहर लाल खट्टर के नाम का ऐलान हुआ। खट्टर उस समय पहली बार विधायक बने थे और उन्हें मुख्यमंत्री पद का सबसे मजबूत दावेदार नहीं माना जा रहा था। BJP का यह फैसला काफी चौंकाने वाला था। इससे यह संकेत भी मिला कि पार्टी में लंबे समय से संगठन के साथ जुड़े और नेतृत्व के भरोसे वाले चेहरे को अचानक बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

योगी के नाम ने बदला खेल

2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में BJP को भारी बहुमत मिला तो मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलें तेज हो गईं। राजनाथ सिंह, मनोज सिन्हा, केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा जैसे नाम चर्चा में थे। मनोज सिन्हा का नाम अंतिम दौर में काफी मजबूत माना जा रहा था। लेकिन पार्टी ने सबको चौंकाते हुए गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री चुना। योगी की पहचान पहले से हिंदुत्व के बड़े चेहरे के रूप में थी, लेकिन चुनाव के तुरंत बाद मुख्यमंत्री बनने की स्थिति स्पष्ट नहीं थी। इस फैसले ने यूपी की राजनीति की दिशा ही बदल दी।

निर्मला को मिला वित्त मंत्रालय

BJP का यह अंदाज केवल राज्यों में मुख्यमंत्री चुनने तक सीमित नहीं रहा। 2019 में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान वित्त मंत्रालय को लेकर भी कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। पीयूष गोयल अंतरिम वित्त मंत्री के तौर पर बजट पेश कर चुके थे, इसलिए उनके नाम की चर्चा स्वाभाविक थी। लेकिन अंतिम फैसला निर्मला सीतारमण के पक्ष में गया। वह इससे पहले रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रही थीं और देश की पहली पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री रह चुकी थीं। वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी देना भी नेतृत्व के भरोसे और अप्रत्याशित चयन का उदाहरण माना गया।

फैसला आखिरी पल में

जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि क्या BJP में पदों के लिए पहले से चल रहे नाम सिर्फ संभावनाएं होते हैं? पार्टी की राजनीति में अंतिम निर्णय तक कई समीकरण बदल सकते हैं। यही वजह है कि मुख्यमंत्री हो या केंद्रीय मंत्री, संगठन का पद हो या राम मंदिर ट्रस्ट जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी, सार्वजनिक चर्चा में आगे चल रहा नाम जरूरी नहीं कि अंतिम सूची में भी सबसे ऊपर हो। BJP के पिछले फैसलों को देखें तो सरप्राइज चॉइस उसकी राजनीति की एक खास पहचान बनती दिखाई देती है।

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