Driving Licence Rules: अगर आपके ड्राइविंग लाइसेंस (DL) की वैधता खत्म हो चुकी है और आपने समय रहते उसका नवीनीकरण नहीं कराया है, तो अब आपको दोबारा ड्राइविंग टेस्ट देना पड़ सकता है। राजधानी में अत्याधुनिक ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर (ADTC) शुरू होने जा रहा है, जहां सेंसर और कैमरों की निगरानी में पूरी तरह डिजिटल टेस्ट लिया जाएगा।
इस नई व्यवस्था का उद्देश्य ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है।
एक साल से ज्यादा एक्सपायर DL पर देना होगा टेस्ट
मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार ड्राइविंग लाइसेंस की समाप्ति तिथि के एक वर्ष तक नवीनीकरण कराने पर आमतौर पर दोबारा ड्राइविंग टेस्ट की जरूरत नहीं होती। लेकिन यदि लाइसेंस एक साल से अधिक समय से एक्सपायर है, तो आवेदक को फिर से ड्राइविंग टेस्ट पास करना होगा।
नए ऑटोमेटिक टेस्टिंग सिस्टम के लागू होने के बाद यह प्रक्रिया और अधिक सख्त हो जाएगी।
सेंसर और कैमरों की निगरानी में होगा परीक्षण
नए ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर में आवेदकों को पहले सिम्युलेटर पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद उन्हें वास्तविक टेस्टिंग ट्रैक पर वाहन चलाकर अपनी ड्राइविंग क्षमता साबित करनी होगी।
ट्रैक पर जगह-जगह सेंसर और हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं, जो हर गतिविधि पर नजर रखेंगे। यदि वाहन चालक कोई गलती करता है तो सेंसर तुरंत बीप करेगा और पूरी गतिविधि कैमरे में रिकॉर्ड हो जाएगी।
3 से 4 मिनट में पूरा करना होगा ट्रैक
दोपहिया, चार पहिया और भारी वाहनों के लिए अलग-अलग टेस्टिंग ट्रैक बनाए गए हैं। कार चालकों को पैरलल पार्किंग, रिवर्स ड्राइविंग और चढ़ाई (ग्रेडिएंट) जैसे टेस्ट देने होंगे।
प्रत्येक चरण के लिए निर्धारित समय होगा और पूरे ट्रैक को लगभग 3 से 4 मिनट के भीतर पूरा करना होगा। समय सीमा या नियमों का पालन नहीं करने पर टेस्ट में असफल माना जा सकता है।
पहले होती थी मैनुअल जांच
अब तक ट्रांसपोर्ट नगर और देवा रोड स्थित कार्यालयों में ड्राइविंग टेस्ट मैनुअल तरीके से लिए जाते थे। इस व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। नए ऑटोमेटिक सिस्टम से मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और टेस्टिंग प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष बनने की उम्मीद है।
आवेदकों को मिलेगी आधुनिक सुविधा
नए केंद्र में ड्राइविंग कौशल की जांच पूरी तरह तकनीक आधारित होगी। इससे योग्य चालकों को लाइसेंस मिलेगा और सड़क सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा। परिवहन विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया में पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।
