प्रयागराज ऑनलाइन डेस्क। एक तांगेवाले के घर पर अतीक अहमद का जन्म होता है। घर पर एक वक्त का खाना पकता। नून और सरसों के तेल वाली अतीक चपाती खाता। जिसका असर भी हुआ। अतीक अहमद का शरीर बिकराल और आंखें खूंखार गुंडे की तरह दिखने लगी। फिर क्या था। एक मौके की तलाश में अतीक जुट जाता है। तभी कसारी-मसारी के रंगबाज चांद बाबा से अतीक की मुलाकात होती है। चांदबाबा उस वक्त कसारी-मसारी का रंगबाज के नाम से जाना जाता है। खातिर दिमाग अतीक को चांदबाबा की पूरी हिस्ट्री की जानकारी पहले से ही होती है। अतीक चांदबाबा का ड्राइबर बन जाता है और यहीं से उसके जरायम की दुनिया मे एंट्री की शुरूआत हो जाती है।
यहीं से डॉन अतीक भाई बन जाता है
चुनाव आते हैं चांद बाबा विधायिकी का पर्चा दाखिल करता है। पर अतीक को भी सफेद कपड़े में अपना भविष्य दिखने लगता है। मतदान के बाद मतगणना का कार्य चल रहा होता है। कसारी-मसारी के रंगबाज चांदबाबा अतीक को मारने का आदेश दे देता है। चांदबाबा अतीक को मार पारा उससे पहले ही अतीक उसके शरीर पर 50 गोलियां दागकर ऐलान कर देता है कि अब कसारी-मसारी में रंगबाज का नहीं बल्कि डॉन की हुकूमत चलेगी। फिर क्या था अतीक के ऐलान के बाद सैकड़ों की भीड़ आगे बढ़ती है और डॉन को गोदी में उठा लेती है और यहीं से डॉन अतीक भाई बन जाता है।
अतीक का भाई भी कमबख्त विलेन निकला
फिर क्या था चांदबाबा की हत्या कर अतीक अहमद कसारी-मसारी के बलूल के बगीचों को बेताज बादशाह बन जाता है। बबूल के पेड़ों की कटाई कर कोयला बनवाता है और महज कुछ सालों के अंदर अतीक तांगेवाले के बजाए अतीक विधायक जी बनकर प्रयागराज का शहंशाह बन जाता है। फिर क्या था जहां देखी जमीन उस पर किया कब्जा। भाई भी कमबख्त विलेन निकला। जहां देखी छोरी उसे जबरन उठवा लेता। विधायक से अतीक सांसद बन जाता है और सुपरी किलर भाई को विधायक बनवा देता है। कहते हैं कि अतीक के इशारे पर सरकारें चलती थीं। बड़े-बड़े नेता उसके डॉगी से हाथ मिलाया करते थे।
अति का कुछ ऐसे हुआ अंत
कहते हैं कि अति का अंत होता है। अतीक को शाएद अपने अंत का एहसास नहीं था। सूबे में भगवाधारियों की सरकार बन जाती है। अतीक को अपनी दादागिरी पर शायद ज्यादा विश्वास था और इसी सनक के चलते उसने उमेश पाल की हत्या करवा दी। फिर क्या हुआ सभी ने देखा। आजाद भारत के इतिहास में पहला लाइव मर्डर अतीक और उसके भाई का होता है। तीन लौंडे आते हैं और अतीक और उसके भाई अशरफ के शरीर पर जीभर के पीतल भर देते हैं। ये तो कहानी अतीक के जन्म अंत की हुई। डॉन अतीक की मौत के बाद एक किताब बाजार में आई है। जिसका नाम कसारी-मसारी है। इस किताब को राइटर मनोज राजन त्रिपाठी ने लिखा है। उन्होंने एक प्रोटकास्ड को दिए इंटरव्यू के कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं।
मनोज राजन त्रिपाठी ने बताए अहम राज
मनोज राजन त्रिपाठी बताते हैं कि अतीक और उसके भाई की मौत की स्किप्ट पहले से ही तैयार कर ली गई थी। मनोज त्रिपाठी के मुताबिक, जब उमेश पाल का मर्डर हुआ तब असद को कार में रहने को कहा गया था पर वह बाहर आया और गोलियां चलाईं। उस शूटआउट को सबने अपनी आखों से देखा। हत्याकांड के असद फरार होता है। गुड्डू मुस्लिम भी प्रयागराज छोड़ देता है। पर झांसी में गुड्डू मुस्लिम अतीक एंड बदमाश कंपनी के साथ खेला कर देता है। फिर क्या था एसटीएफ को असद के ठिकाने की लोकेशन मिलती है और अतीक का बेटा मारा जाता है।
झांसी में था गुड्डू मुस्लिम
मनोज राजन त्रिपाठी खुलकर बताते हैं कि गुड्डू मुस्लिम ही वो मोहरा था, जिसने अतीक की लंका जलाई। फिलहाल गुड्डू मुस्लिम देश से बाहर है और उसे बकाएदा बार्डर पार करवाया गया है। अब गुड्डू मुस्लिम का चैप्टर क्लोज हो चुका है। मनोज राजन त्रिपाठी इशारों-इशारों में बताते हैं कि उमेश पाल की हत्या के बाद गुड्डू मुस्लिम झांसी की सरहद नहीं पार कर पाया था। गुड्डू मुस्लिम ने झांसी में रहते हुए पुलिस को असद के बारे में जानकारी दी। अतीक के राज बताए। जिसके बाद पुलिस ने असद को ठिकाने लगाया। मनोज राजन त्रिपाठी यहां तक बताते हैं कि जिन तीन शूटर्स ने अतीक-अशरफ का गेमओवर किया, उन्हें झांसी में भी फुल ट्रेनिंग दी गई।
दुबई भागा गुड्डू मुस्लिम
बता दें, ऐसी खबर आई थी कि गुड्डू मुस्लिम जांच एजेंसियों को चकमा देकर दुबई फरार हो गया है। वह बीती छह दिसंबर को कोलकाता एयरपोर्ट से एतिहाद एयरलाइंस की कोलकाता-दुबई फ्लाइट से गया है। उसने सैयद वसीमुद्दीन के नाम से फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल किया। केंद्रीय खुफिया एजेंसी ने यह सूचना यूपी पुलिस के साथ साझा की थी। इनसब के बीच जांच एजेंसियां जानकारी जुटा रही हैं कि गुड्डू मुस्लिम के फरार होने में किसने मदद की। आशंका जताई जा रही है कि कोलकाता में माफिया अतीक अहमद के करीबी गद्दी बिरादरी के लोगों ने फरार होने में उसकी मदद की है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं अतीक की पत्नी शाइस्ता और उसके भाई अशरफ की पत्नी जैनब भी तो दुबई फरार नहीं हो चुके हैं।
बमबाज के नाम से महशहूर गुड्डू मुस्लिम
अतीक अहमद के संपर्क में आने से पहले गुड्डू मुस्लिम यूपी के कई माफियाओं के लिए घटनाओं को अंजाम दे चुका था। उसके संपकों की वजह से अतीक उस पर सबसे ज्यादा भरोसा करता था। यूपी के अंडरवर्ल्ड में बमबाज के नाम से मशहूर गुड्डू मुस्लिम, उर्फ गुड्डू शूटर करीब 23 महीने से फरार है। अब उसके दुबई भागने के बाद एजेंसियों की मुश्किलें बढ़नी तय हैं। यूपी के कई बड़े अपराधी पहले भी दुबई में पनाह ले चुके हैं। इनमें सहारनपुर का खनन माफिया एवं पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल, शाइन सिटी घोटाले का मास्टरमाइंड राशिद नसीम, एलयूसीसी चिटफंड घोटाले का मास्टरमाइंड समीर अग्रवाल शामिल हैं।