U P Bridge Collapse: हमीरपुर में निर्माणाधीन पुल गिरा, आंधी-तूफान के बीच बड़ा हादसा, मलबे में दबकर पांच मजदूरों की मौत

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में तेज आंधी और बारिश के दौरान निर्माणाधीन पुल गिर गया। हादसे में पांच मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य के मलबे में फंसे होने की आशंका है।

Hamirpur Bridge Collapse: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। यहां तेज आंधी और बारिश के बीच बेतवा नदी पर बन रहा एक निर्माणाधीन पुल अचानक भरभराकर गिर गया। पुल का बड़ा हिस्सा गिरने से उसके नीचे सो रहे मजदूर मलबे में दब गए। हादसे में अब तक पांच मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।

यह हादसा थाना लालपुर क्षेत्र में मोराकंदर और कुरारा की मवाईजार गांव को जोड़ने वाले पुल निर्माण स्थल पर हुआ। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही कई थानों की पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया।

पुल के नीचे सो रहे थे मजदूर

जानकारी के मुताबिक, हादसा गुरुवार और शुक्रवार की रात करीब 3 बजे हुआ। उस समय तेज बारिश और आंधी चल रही थी। बताया जा रहा है कि पुल के नीचे कई मजदूर सो रहे थे। ये सभी मजदूर सुबह उठकर फिर निर्माण कार्य में लग जाते थे।

अचानक पुल का एक बड़ा हिस्सा ढह गया और नीचे सो रहे मजदूर मलबे में दब गए। हादसे के बाद वहां चीख-पुकार मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी।

राहत और बचाव कार्य जारी

हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन की टीमों ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू अभियान शुरू किया। जेसीबी मशीनों और अन्य उपकरणों की मदद से मलबा हटाने का काम जारी है। स्थानीय लोग भी बचाव कार्य में प्रशासन की मदद कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभी भी कई मजदूरों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। इसी वजह से राहत कार्य लगातार जारी है। प्रशासन ने आसपास के अस्पतालों को भी अलर्ट पर रखा है।

सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल

हादसे के बाद निर्माण कार्य में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि मजदूरों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। बताया जा रहा है कि खराब मौसम के बावजूद मजदूरों को निर्माण स्थल के पास ही रुकना पड़ता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते, तो शायद इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुट गया है।

बढ़ सकता है मौत का आंकड़ा

मलबे में अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका के चलते मौत का आंकड़ा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहा है और हालात पर नजर बनाए हुए है। जानकारी के अनुसार, यह पुल राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद की पहल के बाद मंजूर हुआ था। यह पुल उनके पैतृक गांव मोरकंदर परसानी के पास बनाया जा रहा था।

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