Kanwar Yatra 2026: उत्तर प्रदेश में इस बार कांवड़ यात्रा ने विशाल धार्मिक आयोजन का रूप ले लिया। 30 जुलाई से शुरू हुई कांवड़ यात्रा 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि के अवसर पर जलाभिषेक के साथ संपन्न हुई। करीब 12 दिनों तक यूपी और उत्तराखंड को जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों पर कांवड़ियों की भारी भीड़ देखने को मिली। अनुमान के मुताबिक, इस यात्रा में करीब 4.5 करोड़ शिवभक्त शामिल हुए।
हरिद्वार पहुंचे 4.8 करोड़ श्रद्धालु
कांवड़ियों ने हरिद्वार, गंगोत्री और गंगा के दूसरे घाटों से गंगाजल उठाकर अपने-अपने क्षेत्रों के शिवालयों की ओर प्रस्थान किया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद और सहारनपुर में यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिली। हरिद्वार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी करीब 4.8 करोड़ तक पहुंचने का दावा किया गया।
60 हजार से ज्यादा जवानों की तैनाती
इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। कांवड़ यात्रा मार्गों पर 60 हजार से अधिक पुलिस और सुरक्षा बल के जवान तैनात रहे। इनमें यूपी पुलिस, पीएसी, सीआरपीएफ, एटीएस, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के जवान शामिल थे।
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 30 हजार से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों से संवेदनशील स्थानों और प्रमुख चौराहों पर निगरानी की गई। इसके अलावा ड्रोन के जरिए भी यात्रा मार्गों पर नजर रखी गई।
स्वास्थ्य सुविधाओं के भी किए गए इंतजाम
कांवड़ियों की सुविधा के लिए प्रमुख मार्गों पर 32 स्वास्थ्य शिविर लगाए गए। वहीं, छह प्रमुख कांवड़ मार्गों पर 18 बाइक एंबुलेंस तैनात की गईं। भीड़भाड़ और संकरे रास्तों में इन एंबुलेंसों के जरिए जरूरतमंद श्रद्धालुओं तक जल्द चिकित्सा सहायता पहुंचाने की व्यवस्था की गई।
अराजक तत्वों पर प्रशासन की नजर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे। अराजकता, अफवाह और उपद्रव फैलाने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए। हालांकि कुछ स्थानों पर डीजे की आवाज, कांवड़ की ऊंचाई और हथियार लेकर चलने को लेकर विवाद भी सामने आए।
प्रशासन के मुताबिक, व्यापक सुरक्षा और व्यवस्थाओं के बीच 12 दिन तक चली कांवड़ यात्रा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई।






