Missing Minor Girls Cases: नाबालिग लड़कियों के गायब होने और अपहरण के मामलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने राजधानी में ऐसे मामलों की स्थिति पर पुलिस प्रशासन से जवाब तलब करते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं।
12 वर्षीय बच्ची के मामले में सुनवाई
मामला 12 वर्षीय एक बच्ची के लापता होने से जुड़ा है, जो करीब चार महीने से गायब थी। पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट पिता ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी। अदालत की सख्ती के बाद पुलिस ने बच्ची को बरामद कर न्यायालय में पेश किया। कोर्ट में बच्ची ने अपने पिता के साथ जाने की इच्छा जताई, जिसके बाद उसे उनके सुपुर्द कर दिया गया।
81 मामलों का खुलासा, 15 लड़कियां अब भी लापता
अदालत में दाखिल हलफनामे में डीसीपी पूर्वी ने बताया कि उनके अधीन आने वाले नौ थाना क्षेत्रों में कुल 81 लड़कियों के अपहरण या बहला-फुसलाकर ले जाने के मामले सामने आए हैं। इनमें अधिकांश नाबालिग हैं। पुलिस अब तक 66 लड़कियों को बरामद कर चुकी है, जबकि 15 लड़कियां अभी भी लापता हैं।
तीन दिन में रिपोर्ट देने का आदेश
न्यायालय ने डीसीपी को निर्देश दिया है कि वह सभी लंबित मामलों की स्वयं निगरानी करें और तीन दिनों के भीतर प्रगति रिपोर्ट पेश करें। अदालत ने यह भी कहा कि लापरवाही बरतने वाले थाना प्रभारी, चौकी प्रभारी और विवेचकों को सचेत किया जाए तथा जरूरत पड़ने पर जिम्मेदारी सक्षम अधिकारियों को सौंपी जाए।
वकीलों की हड़ताल पर भी हाईकोर्ट सख्त
सुनवाई के दौरान अदालत ने कैसरबाग स्थित सिविल कोर्ट परिसर के आसपास अतिक्रमण हटाने के विरोध में हुई वकीलों की हड़ताल पर भी कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने संबंधित बार एसोसिएशनों के पदाधिकारियों और कुछ अधिवक्ताओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
अदालत ने कहा कि न्यायिक कार्य का बहिष्कार और हड़ताल सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट के निर्देशों के विपरीत है और इससे आम वादकारियों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ता है।
