आखिर मोहन भागवत ने ऐसा क्या, जिसके समर्थन में उतरे मुस्लिम संगठन, मौलाना रजवी भी RSS की कर रहे ‘जय-जयकार’

आरएसएस चीफ मोहन भागवत का भाषण और उनके लिख पिछले कई दिनों से चर्चा में बने हुए हैं। सोशल मीडिया में लोग मोहन भागवत के बयान की जमकर प्रशंसा कर रहे हैं ।

लखनऊ ऑनलाइन डेस्क। आरएसएस चीफ मोहन भागवत का भाषण और उनके लिख पिछले कई दिनों से चर्चा में बने हुए हैं। सोशल मीडिया में लोग मोहन भागवत के बयान की जमकर प्रशंसा कर रहे हैं तो वहीं कई मुस्लिम संगठन उनके बयानों की भी आलोचना कर रहे हैं। कुछ ऐसे भी मुस्लिम संगठन से जुड़े मौलाना हैं, जो आरएसएस चीफ की जय-जयकार भी कर रहे हैं। इन्ही में से इस्लामिक स्कालर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी भी हैं, जो खुलकर मोहन भागवत और आरएसएस के पक्ष में ताबड़तोड़ बैटिंग कर रहे हैं।

इस्लामिक स्कालर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने आरएसएस और मोहन भागवत को लेकर बड़ा बयान दिया। मौलाना ने कहा कि संघ भारत का सबसे बड़ा संगठन है। भारत में किसी भी धर्म के मानने वालों का इतना बड़ा संगठन अभी तक वजूद में नहीं आया है। मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि मोहन भागवत ने समाज को जोड़ने के लिए विभिन्न मौकों पर ऐसी बातें कही हैं, जिससे देश में सकारात्मक सोच विकसित हुई। उन्होंने कहा था कि हर मस्जिद के नीचे मंदिर मत तलाश करो , यही बात फिर उन्होंने दोहराई है।

मौलाना ने कहा कि संघ प्रमुख की सकारात्मक सोच देश में बढ़ते हिंदू-मुस्लिम तनाव को कम करेगी। उनके बयानों और लेखों को सभी समुदाय के लोग को सकारात्मक सोच के साथ सुनना और पढ़ना चाहिए। मौलाना ने कहा कि अब बहुत सारे ऐसे संगठन जो देश में उपद्रव मचाते रहते हैं। आपसी टकराव और नफरत से न खुद कोई तरक्की कर सकता है और न समाज व न देश आगे बढ़ सकता है। तरक्की के लिए सभी समुदाय के लोगों को एक साथ मिलजुल कर चलना होगा।

शहाबुद्दीन रजवी ने आगे कहा कि बीते दो वर्षों में देखा जा रहा है कि देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक स्थलों जैसे मस्जिद, मदरसा , मकबरों और मजारों को कुछ असमाजिक तत्वों द्वारा निशाना बनाया गया। जिसकी वजह से हालात तनावपूर्ण हो गए। सरकारों को हस्तक्षेप करके मामले को निपटाना पड़ा। संघ प्रमुख के इन प्रयासों के बाद मुसलमानों को उम्मीद जगी है कि अब देश में असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर रोक लगेगी। सौहार्दपूर्ण वातावरण कायम होगा।

बता दें, विज्ञान भवन दिल्ली के सम्मेलन में मोहन भागवत ने कहा कि हर जगह शिवलिंग मत तलाश करो। साथ ही सभी लोगों को साथ में लेकर चलने की बात कही। कहा कि जब सब लोग मिलकर साथ चलेंगे तो देश तरक्की करेगा। आरएसएस प्रमुख ने दो टूक कहा कि आरएसएस आमतौर पर आंदोलनों में शामिल नहीं होता। राम मंदिर आंदोलन में वो जुड़ा था, लेकिन अब बाकी आंदोलनों में शामिल नहीं होगा। हालांकि, हिन्दुओं के लिए काशी, मथुरा और अयोध्या तीनों महत्वपूर्ण हैं। इसलिए हिन्दू समाज इन जगहों के लिए अपनी बात रख सकता है।

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