School Bus Safety: स्कूली बच्चों के सुरक्षित आवागमन और वाहनों में निर्धारित सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर परिवहन विभाग ने मिशन सेफ भविष्य अभियान-3 शुरू किया है। अभियान के दौरान 15 वर्ष पुराने या जरूरी दस्तावेजों और फिटनेस मानकों को पूरा न करने वाले स्कूली वाहनों पर कार्रवाई की जाएगी। स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिक भी कार्रवाई के दायरे में रहेंगे।
19 सितंबर तक चलेगा अभियान
जिले में स्कूली वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए मिशन सेफ भविष्य अभियान-3 शुरू किया गया है। अभियान की शुरुआत सोमवार से हुई और यह 19 सितंबर तक चलाया जाएगा।
परिवहन विभाग के प्रवर्तन दल को स्कूली वाहनों की जांच करने और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करना और स्कूल वाहनों में निर्धारित मानकों का पालन कराना है।
15 साल पुराने वाहन मिले तो होंगे सीज
अभियान के दौरान 15 वर्ष पुराने स्कूली वाहन संचालित मिलते हैं तो उन्हें तत्काल सीज करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे मामलों में वाहन मालिक के साथ संबंधित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि अभियान के पहले दिन कोई स्कूली वाहन कार्रवाई की जद में नहीं आया। रिपोर्ट के अनुसार परिवहन विभाग के प्रवर्तन दल के कई अधिकारी शहर से बाहर होने के कारण पहले दिन जांच अभियान प्रभावी तरीके से नहीं चल सका।
पुराने और अनफिट वाहनों पर पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
स्कूली वाहनों की फिटनेस और सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग पहले भी कई बार अभियान चला चुका है। इसके बावजूद जिले की सड़कों पर कुछ पुराने और अनफिट स्कूली वाहन चलते दिखाई देते हैं।
इनमें ऐसे वाहन भी शामिल हैं, जो निर्धारित 15 वर्ष की अवधि पूरी कर चुके हैं। नए अभियान के तहत ऐसे वाहनों पर सख्त कार्रवाई करने की तैयारी है।
स्कूलों में अटेंडेंट की व्यवस्था जरूरी
परिवहन आयुक्त ने विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को भी सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक स्कूली वाहन में अटेंडेंट की व्यवस्था करना जरूरी होगा।
वहीं जिन वाहनों में छात्राएं यात्रा करती हैं, उनमें महिला अटेंडेंट की नियुक्ति करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे बच्चों की यात्रा के दौरान निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकेगा।
दस्तावेज अधूरे मिले तो भी होगी कार्रवाई
15 वर्ष से कम पुराने स्कूली वाहनों के दस्तावेज भी पूरी तरह दुरुस्त होने चाहिए। इनमें पंजीकरण प्रमाण पत्र, बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र, परमिट और फिटनेस से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।
अधूरे या जरूरी दस्तावेज नहीं मिलने पर ऐसे वाहनों को भी सीज करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा प्रत्येक विद्यालय में विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति गठित करने की बात कही गई है, ताकि स्कूली वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर नियमित निगरानी रखी जा सके।








