Moradabad Wedding Invite Controversy: मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी के भीतर ‘पोस्टर वार’ और तीखी बयानबाजी का मामला अब लखनऊ तक पहुँच गया है। पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन की बेटी की शादी में विपक्षी नेताओं को बुलाने और वर्तमान सांसद रुचि वीरा को दरकिनार करने पर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को हस्तक्षेप करना पड़ा। शीर्ष नेतृत्व की फटकार के बाद, जिला अध्यक्ष जयवीर यादव ने पार्टी नेताओं के लिए सख्त अनुशासन नियमावली जारी की है। अब किसी भी पोस्टर या बैनर पर स्थानीय सांसद और विधायकों की फोटो अनिवार्य होगी। साथ ही, सोशल मीडिया पर एक-दूसरे के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने वालों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि अनुशासनहीनता पर निष्कासन की कार्रवाई की जाएगी।
विवाद की जड़: शादी का कार्ड और सियासी गुटबाजी
Moradabad की राजनीति में हलचल तब शुरू हुई जब पूर्व सपा सांसद डॉ. एसटी हसन की बेटी के निकाह में भाजपा नेताओं और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जैसे दिग्गजों को तो आमंत्रित किया गया, लेकिन अपनी ही पार्टी की वर्तमान सांसद रुचि वीरा को न्योता नहीं मिला। इस पर रुचि वीरा ने सार्वजनिक रूप से डॉ. हसन की निष्ठा पर सवाल उठाए, जिसके बाद दोनों गुटों के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया और पोस्टरों के जरिए जुबानी जंग छिड़ गई। डॉ. हसन ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर सभी दलों के लोगों को बुलाया था और उनके नेता केवल अखिलेश यादव हैं।
नेतृत्व की सख्ती और नए नियम
Moradabad पार्टी की छवि खराब होते देख अखिलेश यादव ने स्थानीय इकाई को कड़ा संदेश भेजा। इसके तुरंत बाद जिला अध्यक्ष जयवीर यादव ने आधिकारिक निर्देश जारी किए:
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सोशल मीडिया पर पाबंदी: फेसबुक और व्हाट्सएप पर पार्टी नेताओं के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप को ‘सस्ती लोकप्रियता’ करार देते हुए प्रतिबंधित कर दिया गया है।
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पोस्टर और बैनर वार: जिले में कहीं भी लगने वाले होर्डिंग या बैनर में अब जनपद के सांसद और विधायकों के चित्र लगाना अनिवार्य होगा। अक्सर देखा गया है कि गुटबाजी के कारण नेता अपने प्रतिद्वंद्वी गुट के जन प्रतिनिधियों की फोटो गायब कर देते थे।
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शिकायत का मंच: किसी भी कार्यकर्ता को शिकायत होने पर सीधे जिला, प्रदेश या राष्ट्रीय अध्यक्ष से संपर्क करने को कहा गया है, न कि सार्वजनिक मंचों पर विवाद करने को।
चुनाव की तैयारी पर जोर
Moradabad जिलाध्यक्ष ने साफ किया कि नेताओं को आपसी मनमुटाव छोड़कर आगामी विधानसभा चुनाव और मतदाता पुनरीक्षण (SIR) जैसे कार्यों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि आपसी कलह से पार्टी को कमजोर करना। अब देखना यह है कि शीर्ष नेतृत्व की इस सख्ती के बाद मुरादाबाद सपा में जारी यह ‘शीत युद्ध’ थमता है या नहीं।









