Mid Day Meal Monitoring Campaign: प्रदेश के सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को मिलने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। अब स्कूलों में बनने वाले भोजन की निगरानी सिर्फ अधिकारियों या शिक्षकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बच्चों की माताएं भी इसमें अपनी अहम भूमिका निभाएंगी। सरकार ने इसके लिए ‘मां’ अभियान शुरू करने का फैसला किया है, ताकि बच्चों को साफ, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिल सके।
मिड-डे मील प्राधिकरण के निदेशक प्रेम रंजन सिंह ने प्रदेश के सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इस नई व्यवस्था को पूरी गंभीरता से लागू करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि सभी स्कूलों में तय प्रक्रिया के अनुसार महिला अभिभावकों का चयन किया जाए और अभियान को नियमित रूप से संचालित किया जाए।
इस योजना के तहत प्रत्येक विद्यालय में छह महिला अभिभावकों का चयन किया जाएगा। इन सभी के नाम स्कूल परिसर में सार्वजनिक रूप से लगाए जाएंगे, ताकि सभी लोगों को इसकी जानकारी रहे। चयनित महिलाओं की जिम्मेदारी तय करने के लिए एक साप्ताहिक रोस्टर बनाया जाएगा। रोस्टर के अनुसार हर महिला सप्ताह में एक दिन स्कूल पहुंचेगी और उस दिन बच्चों के लिए तैयार किए जा रहे भोजन का निरीक्षण करेगी।
महिला अभिभावक भोजन बनने की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेंगी। वे यह भी देखेंगी कि भोजन साफ-सफाई के साथ तैयार किया जा रहा है या नहीं। इसके अलावा भोजन चखकर उसकी गुणवत्ता की जांच करेंगी। यदि उन्हें किसी तरह की कमी या सुधार की जरूरत महसूस होती है तो वे अपने सुझाव भी देंगी, ताकि भविष्य में व्यवस्था और बेहतर बनाई जा सके।
निरीक्षण पूरा होने के बाद संबंधित महिला अभिभावक स्कूल में रखे गए रोस्टर रजिस्टर में अपनी टिप्पणी लिखेंगी और हस्ताक्षर भी करेंगी। इससे यह रिकॉर्ड रहेगा कि किस दिन किस अभिभावक ने निरीक्षण किया और भोजन की गुणवत्ता कैसी पाई गई।
सरकार ने यह भी साफ किया है कि इस जिम्मेदारी के लिए चयनित महिला अभिभावकों को किसी तरह का मानदेय या आर्थिक भुगतान नहीं दिया जाएगा। इसे सामाजिक भागीदारी और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अभिभावकों के सहयोग के रूप में देखा जाएगा। इस पहल का उद्देश्य स्कूल और परिवार के बीच बेहतर तालमेल बनाना भी है।
जिन विद्यालयों में पीएम पोषण योजना के तहत भोजन किसी स्वयंसेवी संस्था (एनजीओ) की ओर से उपलब्ध कराया जाता है, वहां भी यही व्यवस्था लागू रहेगी। ऐसे स्कूलों में भी चयनित महिला अभिभावक भोजन की गुणवत्ता, वितरण व्यवस्था और बच्चों तक भोजन सही तरीके से पहुंचने की प्रक्रिया का निरीक्षण करेंगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि हर बच्चे को समय पर साफ, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिले। सरकार का मानना है कि अभिभावकों की सीधी भागीदारी से व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी और भोजन की गुणवत्ता में लगातार सुधार होगा।