Mowgli Girl Ehsas Death: करीब नौ साल पहले उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के कतर्नियाघाट के जंगलों में मिली एक बच्ची ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। लोगों ने उसे “मोगली गर्ल” के नाम से पहचानना शुरू कर दिया था। बाद में उसे नया नाम ‘एहसास’ दिया गया। अब 18 साल की उम्र में उसकी जिंदगी का सफर खत्म हो गया है। 15 जून को लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में उसने अंतिम सांस ली। उसकी मौत की खबर से समाज कल्याण विभाग, उसकी देखभाल करने वाले लोग और उससे जुड़े कई लोग भावुक हो गए। डॉक्टरों के अनुसार, फेफड़ों की गंभीर बीमारी और खून में संक्रमण उसकी मौत की मुख्य वजह बने।
अचानक बिगड़ी थी तबीयत
जानकारी के मुताबिक, 8 जून को एहसास की तबीयत अचानक खराब हो गई थी। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के बाद कुछ सुधार होने पर 11 जून को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। लेकिन 15 जून को उसकी तबीयत फिर बिगड़ गई। ऑक्सीजन स्तर तेजी से गिरने लगा, जिसके बाद उसे दोबारा अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन आखिरकार उसकी मौत हो गई।
जंगल में मिली थी यह बच्ची
जनवरी 2017 में बहराइच के कतर्नियाघाट वन्यजीव क्षेत्र में गश्त के दौरान वनकर्मियों और स्थानीय लोगों को यह बच्ची मिली थी। उस समय उसका व्यवहार सामान्य बच्चों जैसा नहीं था। वह लोगों से डरती थी, कपड़े पहनने से बचती थी और सीधा चलने के बजाय हाथ-पैरों के सहारे चलती थी। भूख लगने पर वह अजीब आवाजें निकालती थी। उसके व्यवहार ने सभी को हैरान कर दिया था। शुरुआत में उसका नाम पूजा रखा गया, लेकिन बाद में लखनऊ लाने के बाद उसका नाम एहसास रखा गया।
धीरे-धीरे बदली जिंदगी
लखनऊ के विशेष बाल गृह और देखभाल केंद्र में रहने के दौरान उसकी जिंदगी में कई बदलाव आए। वहां के कर्मचारियों और विशेषज्ञों ने उसे सामान्य जीवन के करीब लाने के लिए लगातार प्रयास किए। समय के साथ उसने कपड़े पहनना सीखा, लोगों को पहचानना शुरू किया और दूसरों के सहारे खड़ा होना भी सीख लिया। हालांकि वह पूरी तरह बोल नहीं पाती थी, लेकिन उसकी छोटी-छोटी प्रगति भी देखभाल करने वालों के लिए बड़ी खुशी का कारण बनती थी।
जब पहली बार बोली ‘अम्मा’
उसकी देखभाल से जुड़े लोगों के अनुसार, एक दिन उसने अपनी देखरेख करने वाली महिला को पहली बार “अम्मा” कहकर पुकारा था। यह पल वहां मौजूद सभी लोगों के लिए बेहद भावुक था। कई वर्षों तक उसकी देखभाल करने वाले लोग उसे अपने परिवार का हिस्सा मानने लगे थे। यही वजह है कि उसके निधन की खबर ने सभी को गहरा दुख पहुंचाया।
बचपन की कठिनाइयों का असर
डॉक्टरों का मानना था कि बचपन में उचित देखभाल, पोषण और सामाजिक वातावरण न मिलने के कारण उसके मानसिक और शारीरिक विकास पर असर पड़ा। वह लंबे समय से मिर्गी और अन्य तंत्रिका संबंधी समस्याओं से भी जूझ रही थी। एहसास की कहानी केवल एक बच्ची की कहानी नहीं थी, बल्कि यह संघर्ष, संवेदनशीलता और मानव प्रयासों की ऐसी मिसाल थी, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।









