New Labour Code Bill: योगी सरकार प्रदेश में नए लेबर कोड बिल को अप्रैल से लागू करने की तैयारी में है। राज्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए श्रम विभाग ने केंद्रीय कानून में कुछ छोटे बदलाव किए हैं। संशोधित बिल विधि विभाग को भेज दिया गया है। जनवरी में इसका ड्राफ्ट प्रकाशित कर आम लोगों और संगठनों से आपत्तियां मांगी जाएंगी। 45 दिन बाद जरूरी सुधार कर इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद इसका पालन करना सभी के लिए अनिवार्य होगा।
केंद्र सरकार ने देश में लागू 29 श्रम कानूनों को समेटकर चार लेबर कोड बना दिए हैं। इन्हें पिछले साल 21 नवंबर को लागू किया गया था। राज्यों को इन्हें अपनाने के लिए 90 दिन का समय दिया गया था। इसी प्रक्रिया के तहत 22 दिसंबर को चार समितियां बनाई गईं, जिन्होंने अपनी रिपोर्ट दी। इन रिपोर्टों के आधार पर 9 जनवरी को श्रम विभाग ने संशोधित बिल विधि विभाग को भेजा।
नियुक्ति पत्र देना होगा जरूरी
नए लेबर कोड के तहत अब हर कर्मचारी को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा। चाहे कर्मचारी स्थायी हो, अस्थायी हो, संविदा पर हो, दिहाड़ी मजदूर हो या आउटसोर्सिंग से रखा गया हो, सभी को नियुक्ति पत्र देना होगा। इसमें काम की शर्तें और वेतन का पूरा विवरण लिखा होगा। इसके साथ ही फिक्स्ड टर्म पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी काम के दिनों के हिसाब से ग्रेच्युटी मिलेगी। ईपीएफ और ईएसआई की सुविधा हर हाल में देनी होगी।
बेसिक वेतन कम से कम 50 प्रतिशत
अभी कई कंपनियां ईपीएफ से बचने के लिए बेसिक वेतन बहुत कम रखती हैं। नए कानून में यह तय किया गया है कि कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत बेसिक पे होगा। अधिकारियों के अनुसार इससे कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। साथ ही 40 साल से ज्यादा उम्र के कर्मचारियों का हर साल हेल्थ चेकअप कराना भी जरूरी होगा।
एक लाइसेंस, पूरे देश में मान्य
अब उद्योग लगाने के लिए हर राज्य में अलग-अलग लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। एक ही लाइसेंस पूरे देश में मान्य होगा। कोई भी उद्यमी भारत सरकार के पोर्टल पर आवेदन कर देश के किसी भी राज्य में अपना कारोबार शुरू कर सकेगा।
इंस्पेक्टर नहीं, अब फैसिलिटेटर
नए लेबर कोड के बाद इंस्पेक्टर राज खत्म हो जाएगा। लेबर इंस्पेक्टर को अब फैसिलिटेटर कहा जाएगा। वे सीधे मुकदमा दर्ज नहीं कर सकेंगे। केवल नियमों के उल्लंघन पर समझौता शुल्क लगाया जाएगा। बार-बार नियम तोड़ने पर ही एफआईआर का प्रावधान रहेगा।
रजिस्टर और रिटर्न होंगे कम
अब रिटर्न भरने के लिए 78 रजिस्टरों की जगह सिर्फ आठ रजिस्टर रखने होंगे। फैक्ट्री, व्यापारिक संस्थान और ट्रेड यूनियन एक ही यूनिफाइड रिटर्न भर सकेंगे। श्रमायुक्त मार्कण्डेय शाही के अनुसार, चारों लेबर कोड को अप्रैल से लागू करने की पूरी तैयारी है। विधि विभाग से मंजूरी के बाद बिल प्रकाशित किया जाएगा और तय प्रक्रिया के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा।


