CCTV Recording Issue: थानों में अधूरी सीसीटीवी व्यवस्था, साक्ष्य पेश करने में आ रही परेशानी रिकॉर्डिंग सुरक्षित न होने पर उठे गंभीर सवाल

प्रदेश के कई थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रखी जा रही है। हार्ड डिस्क रैक और पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से सिर्फ 15 दिनों का डेटा ही उपलब्ध रह पाता है।

Police Station CCTV Recording Issue

CCTV Systems In Police Stations:प्रदेश के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे इसलिए लगाए गए थे ताकि पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली पर नजर रखी जा सके। साथ ही यदि किसी व्यक्ति की ओर से पुलिस पर उत्पीड़न या गलत व्यवहार का आरोप लगाया जाए, तो रिकॉर्डिंग के आधार पर सच्चाई सामने लाई जा सके। इसके अलावा अदालत में जरूरत पड़ने पर पुलिस इन रिकॉर्डिंग्स को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के रूप में भी पेश कर सकती थी। लेकिन अब इस व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने में बड़ी कमी

हाल ही में उत्पीड़न से जुड़े एक मामले में अदालत ने पुलिस से सीसीटीवी रिकॉर्डिंग मांगी थी। इसके बाद जो जानकारी सामने आई, उसने पूरे सिस्टम की कमियों को उजागर कर दिया।
विभाग की ओर से अदालत को दी गई रिपोर्ट में बताया गया कि कई थानों में सीसीटीवी कैमरे तो लगाए गए हैं, लेकिन उनके साथ जरूरी हार्ड डिस्क रैक नहीं लगाए गए। इसी वजह से रिकॉर्डिंग को लंबे समय तक सुरक्षित रखना संभव नहीं हो पा रहा है। स्थिति यह है कि कई थानों में केवल 15 दिनों तक की रिकॉर्डिंग ही सुरक्षित रह पाती है। उसके बाद पुराना डेटा स्वतः हट जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे स्पष्ट निर्देश

उच्चतम न्यायालय ने पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए थे कि थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग कम से कम 18 महीने तक सुरक्षित रखी जानी चाहिए। यदि किसी तकनीकी कारण से ऐसा संभव न हो, तो कम से कम छह महीने की रिकॉर्डिंग उपलब्ध रहनी चाहिए। लेकिन कई जगहों पर इन निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं हो पाया है।

पुराने आदेश का भी दिया गया हवाला

इस मामले में याचिका दायर करने वाली युवती ने अपने वकील के माध्यम से वर्ष 2021 के एक महत्वपूर्ण फैसले का भी उल्लेख किया। यह मामला परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह से जुड़ा था। उस आदेश में कहा गया था कि हर थाने में ऐसे सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं जिनमें नाइट विजन की सुविधा हो। साथ ही कैमरों में साफ तस्वीर और स्पष्ट आवाज रिकॉर्ड करने की क्षमता भी होनी चाहिए, ताकि ऑडियो और वीडियो दोनों साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किए जा सकें।

कम क्षमता वाले कैमरों की भी समस्या

जानकारी के अनुसार, कई थानों में केवल चार या पांच कैमरे ही लगाए गए हैं। कुछ जगहों पर अभी तक कैमरों की खरीद और स्थापना का काम भी पूरा नहीं हुआ है। इसके अलावा कैमरों की दिशा और स्थिति पर भी नियमित निगरानी नहीं रखी जाती। कई बार तेज हवा, बारिश या बंदरों की वजह से कैमरों का एंगल बदल जाता है। ऐसे में कैमरे जरूरी जगहों की बजाय दीवार या सड़क की रिकॉर्डिंग करते रहते हैं।

सुधार की तैयारी में विभाग

इस पूरे मामले पर एसपी सौरभ दीक्षित ने कहा है कि सभी थानों में बेहतर गुणवत्ता वाले और पर्याप्त संख्या में कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी। जिन थानों में कम क्षमता वाले कैमरे लगे हैं, वहां जल्द सुधार का काम कराया जाएगा ताकि भविष्य में किसी भी जांच या न्यायिक प्रक्रिया में परेशानी न हो।

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