State Demand, पूर्वांचल राज्य की मांग फिर तेज, विपक्षियों की भाषा बोल क्या भाजपा नेताओं ने पार्टी को फंसा दिया

पूर्वांचल राज्य की मांग को लेकर नेताओं ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि अलग राज्य से बेहतर प्रशासन, विकास और रोजगार मिलेगा, जबकि सीएम योगी पहले ही विभाजन का विरोध कर चुके हैं।

Purvanchal State Demand:कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के हजारों लोग मौजूद रहे। मंच से पूर्वांचल राज्य की मांग को लेकर जोरदार अपील की गई। नेताओं ने कहा कि अब यह मुद्दा सिर्फ चर्चा का विषय नहीं रहा, बल्कि इसे संगठित आंदोलन का रूप दिया जाएगा।

बड़ी आबादी, एक प्रशासन यही सबसे बड़ी चुनौती

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता डॉ. संजय सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। एक ही प्रशासनिक ढांचे में इतने बड़े राज्य को सुचारु रूप से चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि जिस राज्य की आबादी दुनिया के कई देशों से ज्यादा हो, वहां विकास और लोकतांत्रिक व्यवस्था दोनों प्रभावित होते हैं। उनके अनुसार, अब समय आ गया है कि पूर्वांचल के लोगों के हित में अलग राज्य बनाया जाए।

कौन-कौन से जिले होंगे शामिल

डॉ. संजय सिंह ने बताया कि प्रस्तावित पूर्वांचल राज्य में यूपी के 8 मंडलों के 28 जिलों को शामिल किया जाएगा। इनमें वाराणसी, चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, प्रयागराज, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही, अयोध्या, अकबरपुर, सुल्तानपुर, अमेठी, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर और संत कबीर नगर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि करीब 7 करोड़ 98 लाख की आबादी के साथ यह देश का 14वां सबसे बड़ा राज्य होगा और 2027 के चुनाव से पहले इसका गठन संभव है।

संयुक्त मंच से चलेगा आंदोलन

डॉ. संजय सिंह ने घोषणा की कि ‘पूर्वांचल राज्य संयुक्त संकल्प मंच’ के जरिए इस मांग को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने सभी सामाजिक और राजनीतिक संगठनों से एकजुट होने की अपील की, ताकि यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से रखा जा सके।

पूर्वांचल की पहचान अलग, उपेक्षा भी अलग

भाजपा की पूर्व मंत्री डॉ. अमीता सिंह ने कहा कि पूर्वांचल की भाषा और संस्कृति अलग पहचान रखती है, लेकिन लंबे समय से यह क्षेत्र प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार रहा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधन, उपजाऊ जमीन और मेहनती लोग होने के बावजूद यह इलाका आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ गया।

कृषि, उद्योग और शिक्षा पर फोकस जरूरी

डॉ. अमीता सिंह ने बताया कि कृषि सुधार और उद्योगों की कमी के कारण बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है। नेपाल से आने वाली नदियों के सही प्रबंधन के अभाव में हर साल बाढ़ और सूखे की समस्या झेलनी पड़ती है। स्वास्थ्य सेवाएं, उच्च शिक्षा संस्थान और आधुनिक ढांचे की कमी भी बड़ी चुनौती है, जिसे अलग राज्य बनने पर ही बेहतर तरीके से सुलझाया जा सकता है।

पर्यटन और ऊर्जा से बदल सकती है तस्वीर

उन्होंने कहा कि पूर्वांचल बिजली उत्पादन का बड़ा केंद्र है। मिर्जापुर और सोनभद्र खनिज संपदा से भरपूर हैं। अयोध्या, काशी और प्रयागराज जैसे धार्मिक स्थल और सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती जैसे बौद्ध केंद्र विदेशी पर्यटन को बढ़ा सकते हैं।

सीएम योगी पहले जता चुके हैं विरोध

हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही राज्य विभाजन की मांग का विरोध कर चुके हैं। उनका मानना है कि उत्तर प्रदेश एकजुट रहकर ही अपनी पहचान और विकास को मजबूत कर सकता है। अब देखना होगा कि यह मांग आने वाले समय में क्या राजनीतिक असर डालती है।

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