Sambhal CJM Transfer: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में न्यायिक नियुक्तियों को लेकर मची हलचल के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। महज 48 घंटे के भीतर संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) को दूसरी बार बदल दिया गया है। कौशांबी के CJM दीपक कुमार जायसवाल अब संभल के नए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट होंगे। इससे पहले विभांशु सुधीर के स्थानांतरण के बाद आदित्य सिंह को इस पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन अब उन्हें वापस चंदौसी में सीनियर डिवीजन सिविल जज के पद पर भेज दिया गया है। यह बदलाव मंगलवार शाम हाईकोर्ट द्वारा जारी 14 जजों की स्थानांतरण सूची का हिस्सा है, जिसने जिले के प्रशासनिक और न्यायिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
तबादलों का चक्र और प्रशासनिक फेरबदल
Sambhal में पिछले कुछ दिनों से न्यायिक अधिकारियों के फेरबदल ने सबको चौंका रखा है। आदित्य सिंह, जिन्हें दो दिन पहले ही पदोन्नति देकर CJM बनाया गया था, उन्हें अचानक उनके पुराने पद पर वापस भेजने के फैसले को हालिया घटनाक्रमों से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके साथ ही, नावेद अकबर को भी संभल से हटाकर चंदौसी में अपर सीनियर डिवीजन सिविल जज नियुक्त किया गया है।
इन तबादलों की पृष्ठभूमि में जिले में चल रहे कुछ बेहद संवेदनशील कानूनी मामले माने जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो न्यायिक आदेशों के क्रियान्वयन और स्थानीय अधिवक्ता वर्ग के बीच उपजे असंतोष ने उच्च न्यायालय को इस त्वरित कार्रवाई के लिए प्रेरित किया है।
विवादों के केंद्र में रहे न्यायिक आदेश
Sambhal हाल के दिनों में अपने अदालती फैसलों के कारण राष्ट्रीय सुर्खियों में रहा है। पूर्व CJM विभांशु सुधीर का तबादला सुल्तानपुर किए जाने के पीछे भी एक विवादित घटनाक्रम रहा। उन्होंने संभल के सीओ रहे अनुज चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था, जिसे पुलिस प्रशासन ने मानने से इनकार कर दिया था। एसपी संभल ने इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही थी।
वहीं, आदित्य सिंह के कार्यकाल के दौरान श्री हरिहर मंदिर बनाम शाही जामा मस्जिद विवाद में सर्वे के आदेश ने भी कानूनी और सामाजिक हलकों में काफी हलचल पैदा की थी। इस मामले में अधिवक्ता वर्ग की नाराजगी और सुरक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को देखते हुए संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है।
भविष्य की चुनौतियां
नए Sambhal CJM दीपक कुमार जायसवाल के सामने अब संभल जैसे संवेदनशील जिले में न्यायिक गरिमा और प्रशासनिक समन्वय बनाए रखने की बड़ी चुनौती होगी। बार और बेंच के बीच के रिश्तों को सामान्य करना और लंबित संवेदनशील मामलों पर निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता रहेगी।









