UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद के हालिया बयान ने नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि अगर भाजपा अपना दरवाजा बंद करेगी तो उन्हें नया राजनीतिक ठिकाना तलाशना पड़ेगा। इस बयान के बाद विपक्ष से लेकर सत्ता पक्ष तक कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल भाजपा के साथ उनका गठबंधन कायम है और उनका उद्देश्य निषाद समाज के हितों की रक्षा करना है।
एनडीए के भीतर बढ़ी बयानबाजी
संजय निषाद के बयान के बाद एनडीए के अंदर भी मतभेद खुलकर सामने आते दिखाई दिए। प्रयागराज की करछना सीट से भाजपा विधायक पीयूष रंजन निषाद ने उनके नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि संजय निषाद पूरे निषाद समाज के सर्वमान्य नेता नहीं हैं। इस बयान ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सहयोगी दलों के बीच इस तरह की बयानबाजी आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सीटों के बंटवारे और राजनीतिक रणनीति को लेकर बढ़ती सक्रियता का संकेत हो सकती है। हालांकि दोनों दलों की ओर से गठबंधन टूटने जैसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
2027 विधानसभा चुनाव के लिए संगठन मजबूत करने पर जोर
पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद निषाद पार्टी अब 2027 के चुनाव को लेकर पूरी तैयारी में जुट गई है। पार्टी ने प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से 380 पर अध्यक्ष और प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है। इसके अलावा 160 सीटों की जिम्मेदारी तीन जोनल प्रभारियों को सौंपी गई है, जबकि 80 सीटों पर बूथ और सेक्टर स्तर तक संगठन को मजबूत किया जा चुका है। पार्टी का लक्ष्य जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करना और चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना है। इसके लिए प्रदेशभर में बड़े सम्मेलन आयोजित करने की भी योजना बनाई गई है।
पुराने चुनावी प्रदर्शन से सीख लेने की कोशिश
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने निषाद पार्टी को 16 सीटें दी थीं, लेकिन इनमें से अधिकांश सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में भी एनडीए के कई सहयोगी दल उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके। इन नतीजों के बाद निषाद पार्टी अब संगठन विस्तार और सामाजिक आधार मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यही वजह है कि पार्टी समय रहते अपनी रणनीति को नए सिरे से तैयार करने में जुटी हुई है ताकि आगामी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके।
भाजपा के साथ रिश्तों पर दी सफाई
लगातार चल रही राजनीतिक चर्चाओं के बीच संजय निषाद ने भाजपा के साथ अपने संबंधों पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ उनका रिश्ता केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक और धार्मिक स्तर पर भी मजबूत है। उनका कहना है कि निषाद समाज के अधिकारों और न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए वे फिलहाल भाजपा के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। हालांकि उनके हालिया बयान ने भविष्य की राजनीति को लेकर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब यह आने वाला समय ही तय करेगा कि यह नाराजगी केवल राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है या फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत।
