उत्तर प्रदेश का सोनभद्र जिला, जो कभी विकास और रोजगार की चुनौतियों के लिए जाना जाता था, आज महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण उद्यमिता की नई मिसाल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और श्रीअन्न (मिलेट्स) को बढ़ावा देने वाली योजनाओं ने यहां की आदिवासी महिलाओं की जिंदगी बदल दी है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब महुआ और मिलेट्स से तैयार उत्पादों के जरिए अच्छी आय अर्जित कर रही हैं।
श्रीअन्न बना महिलाओं की आर्थिक ताकत
योगी सरकार की पहल के बाद श्रीअन्न केवल खेती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन गया है। स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, पैकेजिंग और मार्केटिंग की सुविधाएं मिलने से महिलाएं रागी लड्डू, मिलेट कुकीज, बिस्किट, नमकीन और अलसी के लड्डू जैसे पौष्टिक उत्पाद तैयार कर रही हैं। इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
घोरावल की महिलाओं ने पेश की मिसाल
सोनभद्र के घोरावल विकासखंड स्थित दुर्गा स्वयं सहायता समूह की 15 से अधिक महिलाएं मिलेट्स आधारित खाद्य उत्पाद बना रही हैं। समूह हर महीने करीब 40 से 50 हजार रुपये के उत्पाद बेचता है, जिससे प्रत्येक महिला को सालाना लगभग एक लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय हो रही है।
महुआ उत्पादों से बदल रही जिंदगी
म्योरपुर विकासखंड के लिलासी गांव की खुशबू आजीविका स्वयं सहायता समूह भी सफलता की नई कहानी लिख रहा है। समूह की सदस्य सुनीता देवी के अनुसार, 14 महिलाएं महुआ के लड्डू और सांवा जैसे पारंपरिक उत्पाद तैयार कर रही हैं। अब इनके उत्पादों की मांग दूसरे जिलों से भी आने लगी है, जिससे महिलाओं की आमदनी लगातार बढ़ रही है।
विकास योजनाओं से बदली तस्वीर
सोनभद्र की मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी के अनुसार, सड़क, बिजली, पेयजल और सरकारी योजनाओं की बेहतर पहुंच ने जिले के विकास को नई दिशा दी है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को कौशल विकास और स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। आज सोनभद्र की आदिवासी महिलाएं न सिर्फ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती दे रही हैं।
