Akhilesh Yadav victory chariot: उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘रथ यात्रा’ का अपना एक सुनहरा इतिहास रहा है। 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव एक बार फिर अपने उसी “लकी” रथ के साथ मैदान में उतरने को तैयार हैं, जिसने 2012 में पार्टी को पूर्ण बहुमत की सत्ता दिलाई थी। लखनऊ के जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट की पार्किंग में खड़ा यह आधुनिक रथ महज एक वाहन नहीं, बल्कि सपा के लिए सत्ता के शिखर तक पहुँचने का एक मजबूत राजनीतिक प्रतीक बन चुका है। तकनीकी मरम्मत के बाद पूरी तरह दुरुस्त हो चुका यह रथ अब अखिलेश यादव के साथ प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों की खाक छानने के लिए तैयार है।
पार्टी समाजवादी, मगर “लकी” रथ लग्जरी, चुनावी जंग के लिए तैयार
उत्तर प्रदेश के सियासी रण में समाजवादी पार्टी (सपा) ने 2027 के लिए अपनी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। चुनावी तैयारियों के बीच सबसे अधिक चर्चा Akhilesh Yadav के उस लग्जरी रथ की हो रही है, जिसे पार्टी के भीतर ‘विजय रथ’ के नाम से जाना जाता है। सपा कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह रथ अखिलेश यादव के लिए बेहद भाग्यशाली रहा है।
2012 का इतिहास दोहराने की आस
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद के अनुसार, 2012 के चुनाव में इसी रथ के जरिए अखिलेश यादव ने पूरे प्रदेश का दौरा किया था, जिसका परिणाम समाजवादी पार्टी की पहली पूर्ण बहुमत वाली सरकार के रूप में सामने आया था। पार्टी का मानना है कि यह रथ जब भी सड़कों पर निकलता है, जनता का भारी समर्थन और सैलाब साथ चलता है। रथ की ऊंचाई ऐसी रखी गई है कि अखिलेश यादव भीड़ के बीच से भी दूर-दराज खड़े लोगों को आसानी से दिखाई दे सकें।
हाई-टेक सुविधाओं से लैस है ‘समाजवादी विकास रथ’
भले ही पार्टी की विचारधारा समाजवादी हो, लेकिन चुनावी जंग को धार देने के लिए यह रथ अत्याधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस है।
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लिफ्ट और ऑफिस: रथ के भीतर ही एक मिनी ऑफिस और कॉन्फ्रेंस एरिया बनाया गया है, जहां से चुनावी रणनीति पर चर्चा की जा सकती है।
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आराम और कनेक्टिविटी: पूरी तरह एयर-कंडीशंड इस रथ में लग्जरी कुर्सियां, इंटरनेट के लिए वाई-फाई और टॉयलेट की सुविधा मौजूद है।
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अत्याधुनिक साउंड सिस्टम: जनता को संबोधित करने के लिए इसमें पावरफुल स्पीकर्स और हाई-टेक साउंड सिस्टम लगाया गया है।
गठबंधन और 403 सीटों का लक्ष्य
सपा प्रवक्ता ने संकेत दिए हैं कि INDIA गठबंधन के तहत इस बार रथ पर Akhilesh Yadav के साथ राहुल गांधी भी नजर आ सकते हैं। पार्टी ने 2026 को पूरी तरह ‘चुनावी साल’ घोषित किया है। रणनीति यह है कि चुनाव से पहले राज्य की सभी 403 सीटों पर पहुंचकर ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और किसान-मजदूरों की समस्याओं को सीधे सुना जाए। हालांकि विस्तृत कार्यक्रम अभी आना बाकी है, लेकिन गैराज से निकलकर जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट में खड़ा यह रथ विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करने का संकेत दे रहा है।






