Pankaj Chaudhary District President Appointment: उत्तर प्रदेश भाजपा में आगामी विधानसभा चुनाव और पंचायत चुनावों को देखते हुए सांगठनिक सक्रियता बढ़ गई है। नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के कमान संभालते ही पार्टी उन शेष 14 जिलों में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति करने जा रही है, जहां स्थानीय गुटबाजी के कारण फैसला लंबित था। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और अयोध्या जैसे महत्वपूर्ण जिलों के लिए नए पैनल मांगे गए हैं। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य जातीय समीकरणों को साधना और संगठन के भीतर पनप रहे असंतोष को समाप्त करना है। इन नियुक्तियों के तुरंत बाद प्रदेश और क्षेत्रीय कार्यकारिणी में भी व्यापक फेरबदल की संभावना है, ताकि जमीन पर काम करने वाले कैडर को नई ऊर्जा के साथ चुनावी मैदान में उतारा जा सके।
लंबित जिलों में ‘नया पैनल’ तैयार
प्रदेश अध्यक्ष Pankaj Chaudhary के सामने सबसे पहली और बड़ी चुनौती उन 14 जिलों में तालमेल बिठाना है, जहां स्थानीय गुटबाजी और सांसदों-विधायकों की आपसी खींचतान की वजह से नियुक्तियां अटकी हुई थीं। सूत्रों के अनुसार, पुराने पैनलों को दरकिनार कर क्षेत्रीय संगठनों से तीन-तीन नामों के नए पैनल मांगे गए हैं। इन जिलों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
-
वाराणसी (प्रधानमंत्री का निर्वाचन क्षेत्र)
-
अयोध्या (जिला व महानगर)
-
अंबेडकरनगर, गोंडा, देवरिया और लखीमपुर खीरी
-
सहारनपुर, शामली, अमरोहा और पीलीभीत
संगठन में फेरबदल का मुख्य एजेंडा
भाजपा का पूरा फोकस 2027 के विधानसभा चुनाव और उससे पहले होने वाले स्थानीय निकायों के चुनावों पर है। संगठन में होने वाले इस फेरबदल के पीछे तीन मुख्य रणनीतियां मानी जा रही हैं:
-
जातीय समीकरण: ओबीसी और दलित प्रतिनिधित्व को बढ़ाकर विपक्षी दलों के नैरेटिव को काटना।
-
अनुभव और युवा ऊर्जा का मेल: पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान देने के साथ-साथ सक्रिय नए चेहरों को आगे लाना।
-
भीतरघात पर लगाम: कई जिलों में 84 पूर्व नियुक्त जिलाध्यक्षों को लेकर जारी नाराजगी को दूर करना ताकि चुनाव के समय ‘भीतरघात’ का खतरा कम हो सके।
Pankaj Chaudhary की ‘कैडर फर्स्ट’ रणनीति
प्रदेश अध्यक्ष Pankaj Chaudhary ने अपने परिचयात्मक दौरों के दौरान साफ संकेत दिया है कि संगठन में उन्हीं को जगह मिलेगी जो जमीन पर सक्रिय हैं। उन्होंने हाल ही में विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर फीडबैक लिया है, जिसके आधार पर अब प्रदेश कार्यकारिणी में भी बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
ट्रंप का ‘टैरिफ बम’: भारत पर 500% टैक्स की तैयारी, रूसी तेल पर भड़का अमेरिका, क्या टूटेगी मोदी से दोस्ती?
