UP News: यूपी बोर्ड स्कूलों पर 18% GST, दाखिले के WRN की तारीख में नहीं कोई बदलाव

उत्तर प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त और नई मान्यता के लिए आवेदन करने वाले स्कूलों को अब मान्यता शुल्क के साथ 18 प्रतिशत जीएसटी भी देना होगा। यह नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू है। वहीं सीएसजेएमयू से संबद्ध कॉलेजों में दाखिले के लिए WRN की अंतिम तिथि 20 अगस्त के बाद नहीं बढ़ाई जाएगी।

UP Board School Recognition: यूपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त और नवीन मान्यता के लिए आवेदन करने वाले स्कूलों के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। अब मान्यता या संबद्धता शुल्क के अतिरिक्त 18 प्रतिशत जीएसटी देना अनिवार्य होगा। यह नियम 1 अप्रैल 2026 से ऑनलाइन मान्यता या संबद्धता के लिए आवेदन करने वाले संस्थानों पर लागू किया गया है।

बोर्ड सचिव भगवती सिंह की ओर से जारी सूचना के मुताबिक, जीएसटी जमा होने की पुष्टि के बाद ही मान्यता देने की संस्तुति की जाएगी। बिना जीएसटी भुगतान वाले आवेदन पर न तो विचार किया जाएगा और न ही उसे आगे भेजा जाएगा।

ऑनलाइन अपलोड करनी होगी GST चालान की कॉपी

विद्यालयों को पहले निर्धारित मान्यता आवेदन शुल्क राजकोष में जमा करना होगा। इसके बाद 18 प्रतिशत जीएसटी की राशि परिषद के निर्धारित बैंक खाते में अलग से जमा करनी होगी। भुगतान के बाद उसकी प्रमाणित और स्पष्ट रसीद या चालान की प्रति ऑनलाइन आवेदन के दौरान पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।

संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को भी इसकी प्रति उपलब्ध कराना जरूरी होगा। बोर्ड ने जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिया है कि वे वित्तविहीन विद्यालयों के प्रबंधकों, प्रधानाचार्यों और नई मान्यता के आवेदकों को इस व्यवस्था की जानकारी दें।

कॉलेज दाखिले के लिए WRN की तारीख नहीं बढ़ेगी

दूसरी ओर, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) से संबद्ध महाविद्यालयों में दाखिले को लेकर भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब दाखिले के लिए जरूरी वेब रजिस्ट्रेशन नंबर (WRN) की अंतिम तिथि बार-बार बढ़ाने की व्यवस्था पर रोक लगा दी गई है।

20 अगस्त को WRN के लिए अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी, जिसे अब आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। राजभवन में हुई बैठक के बाद राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के निर्देश पर विश्वविद्यालय ने इस व्यवस्था को लागू करना शुरू कर दिया है।

समय पर दाखिले और परीक्षा पर जोर

दरअसल, पिछले वर्षों में दाखिले की अंतिम तारीख कई बार बढ़ने के कारण प्रवेश प्रक्रिया अक्टूबर तक चलती रही। इसका असर छात्रों की पढ़ाई और पहले सेमेस्टर की परीक्षा की तैयारी पर पड़ता था। विश्वविद्यालय में पिछले साल करीब दो लाख दाखिले हुए थे, जबकि इस साल अब तक लगभग 1.80 लाख छात्रों का आंकड़ा पहुंचा है।

नई व्यवस्था के तहत अब एक निर्धारित अंतिम तिथि के बाद दाखिले के लिए पंजीकरण पोर्टल दोबारा खोलने से बचने की तैयारी है, ताकि शैक्षणिक सत्र समय पर पूरा हो सके।

 

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