UP Electricity Tariff: उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए इस सप्ताह बड़ी राहत भरी खबर आ सकती है। राज्य विद्युत नियामक आयोग जल्द ही नया टैरिफ ऑर्डर जारी कर सकता है, जिसके तहत बिजली की नई दरें लागू होंगी। हालांकि इस बार बिजली दरों में बढ़ोतरी की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। इसके बजाय कई ऐसी व्यवस्थाएं लागू की जा सकती हैं, जिनसे लाखों उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिलेगा।
घर में छोटी दुकान चलाने वालों को मिल सकती है राहत
नए टैरिफ ऑर्डर में सबसे बड़ी राहत उन लोगों को मिल सकती है जो अपने घर से छोटी दुकान या व्यवसाय संचालित करते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत एक निर्धारित श्रेणी तक ऐसे उपभोक्ताओं को कमर्शल बिजली कनेक्शन लेने की अनिवार्यता से छूट दी जा सकती है।
यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो प्रदेश के 25 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। वर्तमान में कई लोगों को घरेलू परिसर में छोटा व्यवसाय चलाने के बावजूद कमर्शल श्रेणी में आने की आशंका बनी रहती है, जिससे उनका बिजली बिल बढ़ जाता है।
फ्यूल सरचार्ज के बोझ से मिल सकती है राहत
बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक और राहत फ्यूल सरचार्ज को लेकर मिल सकती है। सूत्रों के अनुसार नए टैरिफ ऑर्डर में फ्यूल सरचार्ज की गणना के फॉर्मूले में बदलाव किया जा सकता है। इससे बिजली बिल पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ कम होने की उम्मीद है।
फ्यूल सरचार्ज वह अतिरिक्त राशि होती है जो बिजली उत्पादन की लागत बढ़ने पर उपभोक्ताओं से वसूली जाती है। नए फॉर्मूले के लागू होने से उपभोक्ताओं को लंबे समय तक फायदा मिल सकता है।
ग्रेटर नोएडा के उपभोक्ताओं को लग सकता है झटका
जहां एक ओर अधिकांश उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है, वहीं ग्रेटर नोएडा के बिजली उपभोक्ताओं को झटका लग सकता है। जानकारी के अनुसार उन्हें बिजली बिल में मिलने वाली 10 प्रतिशत की रिबेट समाप्त की जा सकती है।
गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा के उपभोक्ताओं को पिछले चार वर्षों से बिजली बिल पर 10 प्रतिशत की छूट मिल रही है। यदि यह रियायत खत्म होती है तो वहां के उपभोक्ताओं के मासिक बिजली खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है।
स्मार्ट मीटर और मल्टीस्टोरी बिल्डिंग्स पर भी फैसला संभव
नियामक आयोग स्मार्ट मीटर बदलने के खर्च को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय ले सकता है। संभावना जताई जा रही है कि मीटर बदलने का खर्च उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा।
इसके अलावा मल्टीस्टोरी आवासीय भवनों के कॉमन एरिया में होने वाली बिजली खपत को लेकर भी अलग व्यवस्था की जा सकती है। इस फैसले का असर नोएडा, गाजियाबाद, आगरा, मेरठ, लखनऊ, प्रयागराज और वाराणसी जैसे बड़े शहरों में रहने वाले लाखों फ्लैट मालिकों पर पड़ेगा।
उपभोक्ताओं की नजर आयोग के फैसले पर
बिजली कंपनियों की वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) पर सुनवाई के दौरान उपभोक्ता संगठनों ने बिजली दरों में कटौती की मांग भी उठाई थी। उपभोक्ता परिषद का कहना है कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं की बड़ी रकम बकाया है, ऐसे में बिजली दरों में राहत दी जानी चाहिए।
अब सभी की नजर राज्य विद्युत नियामक आयोग के अंतिम टैरिफ ऑर्डर पर टिकी है, जिससे यह तय होगा कि प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को कितनी राहत मिलती है और किन वर्गों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
