यूपी में अब झटपट पास होगा घर का नक्शा: योगी सरकार ने एनओसी के नियम बदले, 15 दिनों में मिलेगी मंजूरी।

योगी सरकार ने यूपी में नक्शा पास कराने की प्रक्रिया को आसान बना दिया है। अब अनावश्यक एनओसी खत्म होगी और आपत्तियों का 15 दिनों में निपटारा होगा। 'लखनऊ मॉडल' के तहत डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता आएगी और विकास कार्यों में तेजी मिलेगी।

UP Cabinet reshuffle

UP Map Approval Rules 2026: उत्तर प्रदेश में घर या व्यावसायिक इमारत बनाने की योजना बना रहे लोगों के लिए योगी सरकार ने बड़ी सौगात दी है। राज्य सरकार ने नक्शा पास कराने की जटिल प्रक्रिया को समाप्त करते हुए इसे पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध बना दिया है। नए नियमों के तहत अब अनावश्यक एनओसी (NOC) की आवश्यकता नहीं होगी और आपत्तियों का निपटारा मात्र 15 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आवास विभाग ने ‘फास्टपास’ (FASTPAS) सिस्टम और नए बिल्डिंग बायलॉज-2025 को लागू किया है, जिससे आम जनता को विकास प्राधिकरणों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अब छोटे भूखंडों पर स्वतः स्वीकृति की सुविधा मिलेगी, जो भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और शहरी विकास को गति देने में मील का पत्थर साबित होगी।

नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव

उत्तर प्रदेश सरकार ने ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देते हुए नक्शा स्वीकृति प्रक्रिया में आमूल-चूल परिवर्तन किए हैं। प्रमुख सचिव आवास पी गुरुप्रसाद ने विकास प्राधिकरणों के साथ हुई बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी नक्शे को बिना ठोस कारण के न रोका जाए।

प्रमुख सुधार और नए नियम

UP Map Approval Rules 2026 सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:

फास्टपास (FASTPAS) और ऑटो-अप्रूवल

नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही योगी सरकार ने सॉफ्टवेयर आधारित UP Map Approval Rules 2026 फास्टपास सिस्टम को सक्रिय कर दिया है।

  1. स्वतः स्वीकृति (Auto-Approval): 100 वर्ग मीटर तक के आवासीय भूखंडों और 30 वर्ग मीटर तक के व्यावसायिक निर्माण के लिए अब किसी अधिकारी की अनुमति की प्रतीक्षा नहीं करनी होगी। यदि नक्शा मानकों के अनुरूप है, तो ऑनलाइन आवेदन करते ही यह स्वतः पास हो जाएगा।

  2. पंजीकृत पेशेवरों की भूमिका: 300 से 500 वर्ग मीटर तक के नक्शों के लिए यदि किसी लाइसेंस प्राप्त आर्किटेक्ट या इंजीनियर ने प्रमाणन दिया है, तो उसे तत्काल स्वीकृत मान लिया जाएगा।

  3. आधार प्रमाणीकरण: धोखाधड़ी रोकने के लिए आवेदन के दौरान आधार ई-केवाईसी को अनिवार्य बनाया गया है।

समिति का गठन और भावी योजना

आवास विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय टीम का गठन किया है। इस समिति की सिफारिशों के आधार पर ही जोनिंग रेगुलेशन-2025 में बदलाव किए जा रहे हैं। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 तक लंबित 1544 नक्शों पर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार का लक्ष्य अनियोजित विकास और अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाना है। इन नियमों से न केवल मध्यम वर्ग को राहत मिलेगी, बल्कि रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश भी बढ़ेगा।

अपर्णा यादव बनाम KGMU प्रशासन: धर्मांतरण विवाद में आर-पार की जंग, सीएम योगी तक पहुंची तकरार

Exit mobile version