Malaria Free Mission: कालाजार और जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारियों के उन्मूलन की दिशा में बड़ी सफलता हासिल करने के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार ने मलेरिया के खिलाफ निर्णायक अभियान शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश को मलेरिया मुक्त बनाने के लिए ‘ट्रैक, टेस्ट और ट्रीट’ रणनीति लागू की है। राष्ट्रीय रणनीति योजना 2023-27 के तहत चलाए जा रहे इस अभियान का लक्ष्य अगले दो वर्षों में राज्य से मलेरिया का पूरी तरह उन्मूलन करना है।
तीन चरणों में चलेगा अभियान
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम को तीन चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में किसी भी मलेरिया रोगी की पहचान होने पर एक दिन के भीतर उसकी सूचना दर्ज की जाएगी। इसके बाद तीन दिनों के भीतर जांच और सात दिनों के अंदर उपचार एवं नियंत्रण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस कार्य में आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मच्छरों के प्रजनन स्थलों पर रहेगी नजर
अभियान के दूसरे चरण में इंटीग्रेटेड वेक्टर मैनेजमेंट पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके तहत मच्छरों की प्रजातियों की पहचान, उनके प्रजनन स्थलों की निगरानी और कीटनाशकों के प्रति प्रतिरोध क्षमता का अध्ययन किया जाएगा। साथ ही लार्वा नियंत्रण के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू कर संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
लगातार घट रहे हैं मलेरिया के मामले
संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम के संयुक्त निदेशक डॉ. ए.के. चौधरी के अनुसार प्रदेश में मलेरिया के मामलों में लगातार कमी आ रही है। वर्ष 2019 में राज्य में 92 हजार से अधिक मलेरिया रोगी पाए गए थे, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर लगभग 14,500 रह गई। इसी अवधि में मलेरिया जांच का प्रतिशत 2.51 से बढ़कर 7.8 प्रतिशत हो गया है। पॉजिटिविटी रेट भी घटकर केवल 0.25 प्रतिशत रह गया है।
पांच जिले हुए मलेरिया मुक्त
स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम यह है कि सहारनपुर, मैनपुरी, आजमगढ़, ललितपुर और महोबा जिले मलेरिया मुक्त घोषित किए जा चुके हैं। हालांकि सीतापुर, बदायूं, बरेली, हरदोई और शाहजहांपुर जैसे जिलों में अभी भी अपेक्षाकृत अधिक मामले सामने आ रहे हैं। इनमें से अकेले सीतापुर में वर्ष 2025 के दौरान 3,643 मलेरिया रोगी दर्ज किए गए।
उच्च जोखिम वाले जिलों पर विशेष फोकस
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और राज्य की संचारी रोग इकाई मिलकर उन जिलों पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जहां मलेरिया के मामले अधिक पाए जा रहे हैं। निगरानी, जांच और उपचार की प्रक्रिया को और मजबूत बनाया जा रहा है ताकि संक्रमण को तेजी से नियंत्रित किया जा सके।
मलेरिया से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार मलेरिया संक्रमित मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। जलभराव, गंदगी और अस्वच्छ वातावरण मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा करते हैं। समय पर जांच और इलाज न मिलने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि मजबूत रणनीति, तकनीकी निगरानी और जनसहभागिता के बल पर अगले दो वर्षों में उत्तर प्रदेश को मलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।
