New City Project: राजधानी लखनऊ में बढ़ती आबादी और आवास की जरूरत को देखते हुए मोहनलालगंज क्षेत्र में दो बड़ी आवासीय योजनाओं को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद इन दोनों योजनाओं को लैंड पूलिंग के जरिए विकसित करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए किसानों की सहमति से करीब 4,500 एकड़ जमीन जुटाई जाएगी। योजना पूरी होने के बाद यहां लगभग दो लाख घर बनाए जाने की संभावना है, जिनमें 8 लाख से ज्यादा लोग रह सकेंगे। इससे मोहनलालगंज क्षेत्र में आबादी के साथ बुनियादी ढांचे का भी विस्तार होगा।
दो साल बाद फिर शुरू कवायद
मोहनलालगंज में भूमि विकास एवं गृहस्थान योजना की प्रक्रिया करीब दो साल बाद दोबारा आगे बढ़ी है। नियोजन समिति की बैठक पूरी हो चुकी है और 2 से 9 अगस्त के बीच किसानों के साथ चर्चा भी की गई। अब लैंड पूलिंग की दरें तय करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद किसानों की आपसी सहमति से जमीन लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। आवास एवं विकास परिषद की ओर से दोनों योजनाओं को लैंड पूलिंग नियमों के तहत विकसित किया जाना है।
2023-24 में मिली मंजूरी
मोहनलालगंज-1 योजना गोसाईगंज के पास प्रस्तावित है। यह पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और सुलतानपुर रोड से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर बताई गई है। परिषद ने 18 अक्टूबर 2023 को बोर्ड बैठक में इस योजना को मंजूरी दी थी। इसके बाद 18 जनवरी 2024 को मोहनलालगंज भूमि विकास एवं गृहस्थान योजना-3 को भी स्वीकृति मिली। अब दोनों योजनाओं के लिए जमीन जुटाने की तैयारी हो रही है। फिलहाल जमीन की कीमत तय कराने की प्रक्रिया चल रही है।
फोर लेन और सिक्स लेन
दोनों आवासीय योजनाओं को एक साथ विकसित करने की योजना है। यहां बनने वाली प्रमुख सड़कों को फोर लेन रखने का प्रस्ताव है, जबकि मुख्य मार्ग को सिक्स लेन बनाया जाएगा। बढ़ती आबादी और वाहनों की संभावित संख्या को देखते हुए अलग-अलग स्थानों पर फ्लाईओवर और अंडरपास भी बनाए जाएंगे। इन सड़कों, पुलों, अंडरपास और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास पर करीब 25 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।
इन गांवों की जमीन
मोहनलालगंज योजना-1 के लिए चांद सराय, कासिमपुर बिरूहा, हबुआपुर, मोअज्जम नगर, सठवारा, सिद्धपुरा, भटवारा, पहाड़ नगर टिकरिया, कबीरपुर और मगहुआ बेली गांवों की जमीन प्रस्तावित की गई है। वहीं योजना-3 के लिए देहरामऊ, पहासा बेली, शिथौलीकला, शिवलर और हबुअबापुर की जमीन चिन्हित की गई है। इन गांवों की जमीन लैंड पूलिंग प्रक्रिया के तहत ली जाएगी, जिसमें किसानों की सहमति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
8 लाख लोगों को घर
दोनों योजनाओं के आकार लेने के बाद मोहनलालगंज क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आवासीय विकास होने की उम्मीद है। करीब दो लाख घरों के निर्माण से 8 लाख से अधिक लोगों के रहने की व्यवस्था तैयार हो सकती है। इसके साथ सड़क, परिवहन और दूसरी सुविधाओं का विस्तार भी होगा। लखनऊ की बढ़ती आबादी के लिए यह परियोजना भविष्य में नए आवासीय क्षेत्र का विकल्प बन सकती है। हालांकि, जमीन जुटाने और किसानों की सहमति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही परियोजना के अगले चरण स्पष्ट होंगे।









