यूपी पंचायत चुनाव 2026: क्या फिर टल जाएगी ‘गांव की सरकार’? आरक्षण की फांस में फंसा चुनावी गणित!

उत्तर प्रदेश की राजनीति में जमीन से जुड़ी सत्ता यानी पंचायत चुनाव को लेकर इन दिनों कशमकश का माहौल है। नए साल में कदम रखते ही प्रदेश के 57,000 से अधिक ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत सदस्यों के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है।

UP Panchayat

UP Panchayat Chunav 2026: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2026 की शुरुआत के साथ ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर सरगर्मी और संशय दोनों बढ़ गए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची (SIRS) के प्रकाशन के बावजूद, समय पर चुनाव कराने की राह में ‘समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग’ (Dedicated OBC Commission) का गठन न होना सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरा है। हालांकि पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर दावा कर रहे हैं कि चुनाव अप्रैल-मई 2026 में ही संपन्न होंगे, लेकिन आरक्षण की संवैधानिक प्रक्रियाओं में हो रही देरी ने विपक्ष और राजनीतिक विशेषज्ञों को चुनाव टलने की आशंका जताने का मौका दे दिया है। वर्तमान में आरक्षण निर्धारण की फाइल शासन स्तर पर लंबित है, जो चुनाव कार्यक्रम को आगे खींच सकती है।

टलने के पीछे का सबसे बड़ा कारण: ओबीसी आरक्षण

UP Panchayat चुनाव टलने के पीछे जो सबसे ठोस तकनीकी और कानूनी कारण बताया जा रहा है, वह है समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन न हो पाना। सुप्रीम कोर्ट के ‘ट्रिपल टेस्ट’ फॉर्मूले के अनुसार, पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण तब तक लागू नहीं किया जा सकता जब तक कि एक समर्पित आयोग पिछड़ेपन की प्रकृति और प्रभाव की जांच कर अपनी रिपोर्ट न दे दे।

पंचायतीराज विभाग ने आयोग के गठन का प्रस्ताव तो शासन को भेज दिया है, लेकिन अभी तक इस पर मुहर नहीं लगी है। बिना आरक्षण सूची जारी हुए चुनाव की तारीखों का ऐलान संभव नहीं है, क्योंकि इसी के आधार पर यह तय होता है कि कौन सी सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी।

सरकार और आयोग की तैयारियां

एक तरफ जहां मंत्री ओमप्रकाश राजभर अप्रैल-मई में UP Panchayat कराने का दावा कर रहे हैं, वहीं निर्वाचन आयोग ने अपनी मशीनरी को सक्रिय कर दिया है:

क्या 2021 की तर्ज पर होंगे चुनाव?

सियासी गलियारों में चर्चा यह भी है कि यदि आयोग के गठन में और देरी हुई, तो क्या सरकार 2021 के पुराने आरक्षण फॉर्मूले पर ही चुनाव कराएगी? हालांकि, यह कानूनी रूप से पेचीदा हो सकता है और मामला दोबारा अदालत की दहलीज तक पहुंच सकता है। 2011 की जनगणना के आधार पर एससी/एसटी का कोटा तो तय है, लेकिन ओबीसी का सटीक डेटा न होना ही असली रोड़ा है।

फिलहाल स्थिति ‘इंतजार और देखो’ वाली है। यदि अगले एक महीने के भीतर पिछड़ा वर्ग आयोग अपनी रिपोर्ट सौंप देता है, तो सरकार के दावे के अनुसार मई-जून 2026 तक UP Panchayat कराए जा सकते हैं। अन्यथा, यूपी की पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति और चुनावों का आगे खिसकना तय माना जा रहा है।

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