UP Police Commissioner System: आईपीएस अधिकारियों को पहले दबाकर रखा जाता था, सीएम योगी ने बताया पुराना हाल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पुलिस कमिश्नर व्यवस्था का प्रस्ताव वर्षों तक लंबित रहा। उन्होंने दावा किया कि पहले आईपीएस अधिकारियों को प्रशासनिक मामलों में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, जिसे अब दूर किया गया है।

UP Police Commissioner System: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में लागू की गई पुलिस कमिश्नर व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को लागू करने का प्रस्ताव कई दशक पहले तैयार हो गया था, लेकिन लंबे समय तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनके अनुसार, वर्ष 1972 से यह मामला लंबित था, लेकिन विभिन्न कारणों से इसे लागू नहीं किया जा सका।

आईपीएस अधिकारियों की मुश्किलें

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले राज्य में आईपीएस अधिकारियों को प्रशासनिक मामलों में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने दावा किया कि कई बार जरूरी फाइलें लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ पाती थीं। इससे कई महत्वपूर्ण फैसले समय पर नहीं हो पाते थे और व्यवस्था प्रभावित होती थी।

फाइलों के अटकने का किया जिक्र

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले अगर कोई फाइल किसी स्तर पर रुक जाती थी, तो उसे आगे बढ़ाना बेहद मुश्किल हो जाता था। उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि एक बार फाइल बंद हो जाए तो उसे दोबारा खुलवाना आसान काम नहीं था। इसी वजह से कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव वर्षों तक लंबित बने रहते थे।

सात जिलों में लागू हुई व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने बताया कि अब उत्तर प्रदेश के सात जिलों में पुलिस कमिश्नर व्यवस्था लागू की जा चुकी है। यह कदम पुलिस सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य पुलिस प्रशासन को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाना है, ताकि कानून-व्यवस्था को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।

लखनऊ और नोएडा से हुई शुरुआत

उत्तर प्रदेश सरकार ने जनवरी 2020 में सबसे पहले लखनऊ और गौतमबुद्धनगर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की थी। इसके बाद इस व्यवस्था का विस्तार अन्य जिलों तक किया गया। सरकार का मानना है कि इससे पुलिस को फैसले लेने में अधिक स्वतंत्रता और तेजी मिली है।

इन जिलों में भी लागू है व्यवस्था

लखनऊ और गौतमबुद्धनगर के बाद वाराणसी, प्रयागराज, गाजियाबाद, कानपुर और आगरा में भी पुलिस कमिश्नर प्रणाली शुरू की गई। इन जिलों में कानून-व्यवस्था से जुड़े कई मामलों में अब निर्णय लेने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और सरल हुई है।

क्या है पुलिस कमिश्नर व्यवस्था

पुलिस कमिश्नर प्रणाली के तहत एक पुलिस आयुक्त, जो आमतौर पर आईपीएस अधिकारी होता है, पुलिस व्यवस्था की कमान संभालता है। इस व्यवस्था में उसे पहले की तुलना में अधिक प्रशासनिक और कार्यकारी अधिकार दिए जाते हैं। सरकार का मानना है कि इससे अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में बेहतर परिणाम मिलते हैं।

सुधारों को बताया जरूरी कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते समय के साथ पुलिस व्यवस्था में सुधार जरूरी था। यही वजह है कि राज्य सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाया और कई जिलों में नई व्यवस्था लागू की। उनका मानना है कि इससे जनता को बेहतर सुरक्षा और तेज प्रशासनिक सेवाएं मिल रही हैं।

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