जाति बनाम धर्म की जंग: जाति की आग में झुलसेगी एकता? ‘हिंदू नहीं, यादव हैं’ वाले बयान से उबाल पर यूपी की राजनीति!

उत्तर प्रदेश में सपा नेता के "हम हिंदू नहीं, यादव हैं" वाले बयान ने जातिगत राजनीति को केंद्र में ला दिया है। जहाँ विपक्षी दल PDA के जरिए पिछड़ों को लामबंद कर रहे हैं, वहीं हिंदू एकता के समर्थक इसे समाज को बांटने वाली साजिश बता रहे हैं।

UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले जातिगत ध्रुवीकरण और धार्मिक एकता के बीच वैचारिक द्वंद्व गहरा गया है। हाल ही में समाजवादी पार्टी के फिरोजाबाद जिलाध्यक्ष शिवराज सिंह यादव द्वारा दिए गए विवादास्पद बयान ने इस बहस को नई हवा दे दी है। एक ओर सपा अपनी ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति के माध्यम से जातिगत चेतना को धार दे रही है, वहीं दूसरी ओर दक्षिणपंथी विचारधारा हिंदू समाज को एकजुट करने के प्रयासों में जुटी है। सपा नेता के बयान—”हम हिंदू नहीं, यादव हैं”—ने न केवल सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा किया, बल्कि इसे हिंदू पहचान को खंडित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। जाति आधारित बैठकों पर प्रतिबंध के बावजूद राजनीतिक दल रणनीतिक रूप से समुदायों को साधने में जुटे हैं।

UP में सपा नेता के “हम हिंदू नहीं, यादव हैं” वाले बयान ने जातिगत राजनीति को केंद्र में ला दिया है। जहाँ विपक्षी दल PDA के जरिए पिछड़ों को लामबंद कर रहे हैं, वहीं हिंदू एकता के समर्थक इसे समाज को बांटने वाली साजिश बता रहे हैं।

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विवादास्पद बयान और PDA की ‘पाठशाला’

फिरोजाबाद में आयोजित एक ‘PDA पाठशाला’ के दौरान सपा नेता शिवराज सिंह यादव ने सवर्णों और पिछड़ों के बीच की खाई को रेखांकित करते हुए तीखी टिप्पणी की। उन्होंने मनुस्मृति का विरोध करते हुए पिछड़ों और दलितों को “शूद्र” बताया और दावा किया कि 10 प्रतिशत लोग 90 प्रतिशत आबादी पर शासन कर रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान अनायास नहीं है, बल्कि सपा की उस सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह गैर-यादव ओबीसी और दलितों को यह अहसास दिलाना चाहती है कि उनकी असली पहचान धर्म नहीं बल्कि जातिगत हक है।

RSS की मथुरा बैठक: एक संक्षिप्त नजर

इसी बीच, मथुरा-वृंदावन के केशव धाम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय कार्यकारिणी बैठक चल रही है। 4 से 10 जनवरी तक चलने वाली इस बैठक में “सामाजिक समरसता” और “हिंदू एकता” पर मंथन किया जा रहा है। संघ का स्पष्ट संदेश है कि जातिगत भेदभाव हिंदू समाज की सबसे बड़ी कमजोरी है, जिसे “बंटेंगे तो कटेंगे” जैसे नारों के माध्यम से दूर करने की कोशिश की जा रही है।

प्रमुख जाति आधारित बैठकें और कार्यक्रम (2025-26)

UP में अदालती प्रतिबंधों के बावजूद, राजनीतिक दलों ने जातिगत लामबंदी के लिए नए तरीके खोज लिए हैं। पिछले एक साल की प्रमुख गतिविधियां निम्नलिखित हैं:

कार्यक्रम/बैठक

तिथि

मुख्य उद्देश्य/विवरण

PDA पंचांग विमोचन

जनवरी 2026

अखिलेश यादव द्वारा लखनऊ और वाराणसी में लॉन्च; महापुरुषों की जीवनी और जातिगत हक का प्रचार।

बाटी-चोखा सहभोज

1 जनवरी 2026

सपा मुख्यालय पर आयोजित, जिसका लक्ष्य पिछड़ों और दलितों के बीच सामाजिक जुड़ाव बढ़ाना था।

राजपूत विधायकों की बैठक

अगस्त 2025

लखनऊ में 40+ राजपूत नेताओं का जमावड़ा, कुंडरकी उपचुनाव की जीत का जश्न और शक्ति प्रदर्शन।

कुर्मी और लोध बैठकें

अगस्त-सितंबर 2025

सरदार पटेल वैचारिक मंच के बैनर तले टिकट और प्रतिनिधित्व पर दबाव बनाने के लिए आंतरिक चर्चा।

PDA पाठशाला

2025-26

राज्यभर में (सहारनपुर से फिरोजाबाद तक) विचारधारा के प्रसार और जातिगत जनगणना की मांग के लिए संचालित।

भीम कोरेगाँव विजय दिवस

1 जनवरी 2026

दलित और अल्पसंख्यक संगठनों द्वारा जम्मू और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में शक्ति प्रदर्शन।

योगी की दिल्ली दौड़: किसे मिलेगी कुर्सी और किसकी होगी विदाई? दिल्ली से आई बड़ी खबर।

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