Electricity Consumer Structure: प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या और उनकी श्रेणी को लेकर नई जानकारी सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में बिजली उपभोक्ताओं की संरचना काफी असंतुलित है। घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या बहुत ज्यादा है, जबकि औद्योगिक उपभोक्ता बेहद कम हैं। यही कारण है कि राजस्व संतुलन बनाने में प्रदेश को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
घरेलू उपभोक्ता सबसे ज्यादा
उत्तर प्रदेश में कुल 3,72,01,097 बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से करीब 3,24,74,855 उपभोक्ता घरेलू हैं, जो लगभग 87 प्रतिशत होते हैं। इतनी बड़ी संख्या के कारण बिजली का अधिकतर बोझ घरेलू उपभोक्ताओं पर ही आता है और बिजली कंपनियों का बड़ा राजस्व भी यहीं से मिलता है।
व्यापार और उद्योग कम
प्रदेश में वाणिज्यिक यानी व्यापारिक उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 23,91,786 है, जो करीब छह प्रतिशत है। वहीं औद्योगिक उपभोक्ता सिर्फ 2,15,033 हैं, यानी लगभग एक प्रतिशत। यही कम संख्या प्रदेश के राजस्व संतुलन पर असर डालती है, क्योंकि उद्योगों से मिलने वाला राजस्व आमतौर पर ज्यादा स्थिर होता है।
कृषि और अन्य कनेक्शन
कृषि क्षेत्र से जुड़े बिजली उपभोक्ताओं की संख्या करीब 15,96,308 है, जो लगभग चार प्रतिशत है। इसके अलावा सरकारी विभागों के 4,27,568 उपभोक्ता हैं, जो करीब एक प्रतिशत हैं। बल्क सप्लाई और अस्थायी कनेक्शन की संख्या 95,547 के आसपास है, जो एक प्रतिशत से भी कम है।
राजस्व संतुलन पर असर
अन्य राज्यों में औद्योगिक उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी ज्यादा होने से वहां बिजली कंपनियों का राजस्व संतुलन बेहतर रहता है। लेकिन उत्तर प्रदेश में घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या अधिक और उद्योग कम होने से वित्तीय संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसके बावजूद स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है।
हानियों में लगातार कमी
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में बिजली क्षेत्र में अच्छा सुधार हुआ है। वर्ष 2021-22 में कुल विद्युत हानियां 31.19 प्रतिशत थीं, जो वर्ष 2024-25 में घटकर 19.21 प्रतिशत रह गई हैं।
वितरण हानि भी घटी
इसी तरह वितरण हानि वर्ष 2021-22 में 19.80 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 13.71 प्रतिशत हो गई है। यह बिजली विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। उम्मीद है कि जल्द ही प्रदेश वितरण हानि को सिंगल डिजिट में लाने वाला अग्रणी राज्य बन सकता है।
बेहतर भविष्य की उम्मीद
बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है और सरकार लगातार व्यवस्था बेहतर करने की कोशिश कर रही है। अगर औद्योगिक निवेश बढ़ता है, तो आने वाले समय में राजस्व संतुलन और मजबूत हो सकता है। इससे बिजली व्यवस्था और मजबूत बनेगी।

