Electricity Demand: भीषण गर्मी के चलते उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग लगातार तेजी से बढ़ रही है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026-27 में राज्य में बिजली की अधिकतम मांग 33,033 मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे उत्तर प्रदेश देश में बिजली मांग के मामले में दूसरे स्थान पर पहुंच सकता है। पहले स्थान पर महाराष्ट्र रहने की संभावना है, जहां मांग 36,858 मेगावाट तक पहुंच सकती है।
देश के प्रमुख राज्यों में बिजली मांग का अनुमान
लोड जनरेशन बैलेंस रिपोर्ट (LGBR) 2026-27 के अनुसार अन्य राज्यों में बिजली मांग इस प्रकार रहने का अनुमान है—
गुजरात में 29,375 मेगावाट, मध्य प्रदेश में 22,563 मेगावाट और तमिलनाडु में 22,488 मेगावाट बिजली की मांग रह सकती है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में इस वर्ष 24 मई को ही बिजली की मांग लगभग 31,824 मेगावाट तक पहुंच चुकी थी, जो राज्य में बढ़ते लोड का संकेत देती है।
विशेषज्ञों की राय और सिस्टम पर दबाव
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष Avadhesh Verma का कहना है कि देश में उत्तर प्रदेश ही ऐसा राज्य है जहां ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे तक रोस्टर लागू है। यदि यह रोस्टर समाप्त कर दिया जाए तो उत्तर प्रदेश बिजली मांग के मामले में महाराष्ट्र को भी पीछे छोड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 3.73 करोड़ उपभोक्ताओं का कुल संयोजित भार 8.57 करोड़ किलोवाट है, जबकि पावर कॉरपोरेशन के पारेषण सब-स्टेशनों की क्षमता लगभग 6.25 करोड़ किलोवाट के आसपास ही है। इस अंतर के कारण पीक आवर्स में बिजली आपूर्ति प्रणाली पर भारी दबाव बन रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क का आधुनिकीकरण और क्षमता विस्तार अब बेहद जरूरी हो गया है।
वर्तमान बिजली आपूर्ति की स्थिति
पावर कॉरपोरेशन के निदेशक (वितरण) Gyanendra Dhar Dwivedi ने बताया कि 16 जून को राज्य में 30,760 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई। वहीं 14 और 15 जून को बिजली आपूर्ति के मामले में उत्तर प्रदेश ने तमिलनाडु, पंजाब और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया।
संविदा कर्मचारियों की वेतन वृद्धि की मांग
इस बीच ऊर्जा निगमों के संविदा कर्मचारियों के मुद्दे भी चर्चा में हैं। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मांग की है कि संविदा कर्मियों को आउटसोर्स सेवा निगम में शामिल किया जाए और उन्हें न्यूनतम 18,000 रुपये मासिक वेतन दिया जाए।
समिति का कहना है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद अभी तक हजारों संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को इस व्यवस्था के दायरे में नहीं लाया गया है, जिससे उनमें असंतोष बना हुआ है।
आगे की चुनौती
गर्मी बढ़ने के साथ बिजली की मांग में और वृद्धि की संभावना है, जिससे आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। ऐसे में उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण तीनों स्तरों पर सुधार और निवेश को लेकर सरकार पर चुनौती और बढ़ गई है।
