UP RERA objection: यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) की बहुप्रतीक्षित 973 आवासीय भूखंडों की योजना पर उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UPRERA) ने ब्रेक लगा दिया है। प्राधिकरण का लक्ष्य जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में इसे लॉन्च करना था, लेकिन दस्तावेजों में जमीन अभी भी किसानों के नाम दर्ज होने के कारण पंजीकरण रुक गया है। दरअसल, रेरा के नियमों के अनुसार किसी भी आवासीय योजना को सार्वजनिक करने से पहले उसका पंजीकरण अनिवार्य है, जिसके लिए जमीन का ‘म्यूटेशन’ यानी नामांतरण प्राधिकरण के पक्ष में होना आवश्यक है। इस देरी ने उन हजारों आवेदकों की उम्मीदों को झटका दिया है, जो जेवर एयरपोर्ट के नजदीक आशियाना बनाने का सपना देख रहे हैं।
योजना का विवरण और वर्तमान स्थिति
यमुना प्राधिकरण ने सेक्टर 15सी, 18 और 24ए में विभिन्न श्रेणियों के प्लॉट प्रस्तावित किए थे। इस UP RERA योजना की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
कुल भूखंड: 973
भूखंडों का आकार: 162 वर्गमीटर से लेकर 290 वर्गमीटर तक।
मुख्य श्रेणियां: 162 वर्गमीटर के 476 प्लॉट और 200 वर्गमीटर के 481 प्लॉट सबसे अधिक संख्या में हैं।
आरक्षण: नियमानुसार 17.5% भूखंड किसानों के लिए और 5% औद्योगिक इकाई स्वामियों के लिए आरक्षित रहेंगे।
पंजीकरण में देरी की मुख्य वजह
UP RERA की आपत्ति मुख्य रूप से मालिकाना हक के दस्तावेजों को लेकर है। हालांकि यीडा ने किसानों से जमीन खरीद ली है और मुआवजा भी वितरित कर दिया है, लेकिन राजस्व अभिलेखों (Revenue Records) में अब भी जमीन का नामांतरण प्राधिकरण के नाम नहीं हुआ है। रेरा ने स्पष्ट किया है कि जब तक जमीन का मालिकाना हक पूरी तरह यीडा के नाम नहीं आता, तब तक पंजीकरण की अनुमति नहीं दी जाएगी।
प्राधिकरण का अगला कदम
यीडा के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को राजस्व विभाग के साथ मिलकर तुरंत ‘नामांतरण’ प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि जैसे ही जमीन यीडा के नाम दर्ज होगी, रेरा का पंजीकरण नंबर प्राप्त कर लिया जाएगा और जनवरी के अंत तक योजना को पुनः लॉन्च किया जा सकेगा।










