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हरिद्वार-ऋषिकेश बनेंगे ‘सनातन पवित्र नगरी’? 105 घाटों पर गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन की तैयारी!

उत्तराखंड के हरिद्वार और ऋषिकेश को 'सनातन पवित्र नगरी' घोषित करने की मांग तेज हो गई है। श्री गंगा सभा ने अर्धकुंभ 2027 से पहले 105 घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा है।

by Mayank Yadav
January 5, 2026
in Latest News, उत्तराखंड
Har Ki Pauri

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Har Ki Pauri Non-Hindu Entry Ban: उत्तराखंड में 2027 के अर्धकुंभ की तैयारियों के बीच हरिद्वार और ऋषिकेश को ‘सनातन पवित्र नगरी’ घोषित करने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। श्री गंगा सभा ने प्रशासन से मांग की है कि हर-की-पैड़ी की तर्ज पर अन्य 105 घाटों पर भी गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई जाए। इस प्रस्ताव के पीछे 1916 के ऐतिहासिक समझौते और 1935 के म्युनिसिपल अधिनियम का हवाला दिया गया है, जो तीर्थक्षेत्र की मर्यादा बनाए रखने पर जोर देते हैं। सूत्रों के अनुसार, धामी सरकार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है ताकि देवभूमि के धार्मिक स्वरूप और सुरक्षा को अक्षुण्ण रखा जा सके। यदि यह निर्णय लागू होता है, तो करीब 150 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र इसके दायरे में आएगा, जिससे धार्मिक पर्यटन और स्थानीय नियमों में बड़े बदलाव होंगे।

विवाद और मांगों का मुख्य आधार

श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम के अनुसार, यह मांग नई नहीं है बल्कि ब्रिटिश काल से चले आ रहे नियमों का विस्तार है। उनका तर्क है कि जब हरिद्वार Har Ki Pauri का विकास हुआ था, तब धार्मिक अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त बायलॉज बनाए गए थे। वर्तमान में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए इन नियमों को सख्ती से लागू करना अनिवार्य हो गया है।

प्रस्ताव के प्रमुख बिंदु

  • घाटों पर प्रतिबंध: Har Ki Pauri की तरह ऋषिकेश और हरिद्वार के सभी 105 प्रमुख घाटों पर केवल हिंदुओं के प्रवेश की अनुमति।

  • रात्रि प्रवास पर रोक: गैर-हिंदुओं के तीर्थ क्षेत्र में स्थायी निवास और रात्रि प्रवास पर पुराने कानूनों के तहत पाबंदी की मांग।

  • अवैध अतिक्रमण: धार्मिक स्थलों के पास बनी अवैध कॉलोनियों और ढांचों पर सख्त कार्रवाई।

  • सनातन पवित्र नगरी: पूरे कुंभ क्षेत्र को आधिकारिक तौर पर सनातन केंद्र घोषित करना।

ऐतिहासिक संदर्भ: 1916 का समझौता

इस पूरी मांग का विधिक आधार पंडित मदन मोहन मालवीय और ब्रिटिश सरकार के बीच 1916 में हुआ समझौता है। इसके बाद 1935 के हरिद्वार नगर अधिनियम में भी गंगा की पवित्रता और तीर्थयात्रियों के आचरण को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए गए थे। सभा का कहना है कि समय के साथ ये नियम कागजों तक सीमित रह गए, जिन्हें अब फिर से प्रभावी बनाने की जरूरत है।

सरकार का रुख

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संकेत दिए हैं कि सरकार तीर्थों की पवित्रता और ‘देवत्व’ बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार पुराने कानूनों का अध्ययन कर रही है। अर्धकुंभ 2027 से पहले इन नियमों पर अंतिम मुहर लगने की संभावना है, जिससे हरिद्वार और ऋषिकेश Har Ki Pauri का स्वरूप पूरी तरह धार्मिक और सनातनी पहचान के इर्द-गिर्द केंद्रित हो जाएगा।

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Tags: Har Ki Pauri

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