Jharkhand Rajya Sabha Election 2026: झारखंड में हुए राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। दो सीटों के लिए हुए चुनाव में NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने जीत दर्ज कर ली। उनके साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम भी राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे। वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा। इस नतीजे को राजनीतिक जानकार महागठबंधन के लिए बड़ा झटका मान रहे हैं। कई विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर आने वाले समय में राज्य की राजनीति और सरकार की मजबूती पर भी पड़ सकता है।
मतगणना में क्या रहे आंकड़े
राज्यसभा चुनाव में परिमल नाथवानी को कुल 28 वोट मिले। वहीं JMM उम्मीदवार बैद्यनाथ राम को 31 वोट प्राप्त हुए। कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को केवल 19 वोट मिले। इसके अलावा 3 वोट अवैध घोषित किए गए। इन आंकड़ों ने साफ कर दिया कि चुनाव के दौरान कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया। यही वजह है कि क्रॉस वोटिंग की चर्चा पूरे राज्य में हो रही है।
भाजपा नेताओं ने दी जीत की बधाई
परिमल नाथवानी की जीत के बाद भाजपा नेताओं ने खुशी जताई। गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई देते हुए कहा कि NDA समर्थित उम्मीदवार की जीत महागठबंधन के लिए बड़ा संदेश है। भाजपा नेता सीता सोरेन ने भी नाथवानी को शुभकामनाएं दीं और उनकी जीत को NDA की बड़ी उपलब्धि बताया। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने भी उन्हें बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि वे झारखंड के लोगों तक केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
क्रॉस वोटिंग ने बढ़ाई सियासी हलचल
झारखंड विधानसभा में कुल 81 सदस्य हैं। राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए एक उम्मीदवार को 28 वोटों की जरूरत थी। NDA के पास केवल 24 वोट थे, लेकिन इसके बावजूद परिमल नाथवानी को 28 वोट मिले। इससे यह संकेत मिलता है कि कम से कम 4 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। यही कारण है कि अब महागठबंधन के भीतर असंतोष और नाराजगी की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
आगे क्या होंगे राजनीतिक मायने
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम केवल एक चुनावी जीत नहीं है, बल्कि झारखंड की राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत भी हो सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि महागठबंधन इस स्थिति से कैसे निपटता है और क्या इस नतीजे का असर राज्य की राजनीतिक स्थिरता पर पड़ता है।







