Domestic Wholesale Food Prices: लगातार आठ कारोबारी दिनों तक बढ़ने के बाद घरेलू थोक बाजार में चीनी की कीमतों में आखिरकार गिरावट देखने को मिली है। चीनी का औसत भाव 91 रुपये प्रति क्विंटल घटकर 5,947 रुपये प्रति क्विंटल रह गया। थोक बाजार में आई इस नरमी का असर खुदरा बाजार में भी दिखाई दिया। खुदरा स्तर पर चीनी की औसत कीमत 73 पैसे घटकर 64.33 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। इसके अलावा गुड़ के भाव में भी 47 रुपये प्रति क्विंटल की कमी आई है। अब गुड़ का औसत भाव 5,960 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। इससे घरेलू बजट पर बढ़ते दबाव के बीच उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
गेहूं हुआ सस्ता
खाद्यान्न बाजार में गेहूं की कीमत में भी कमी दर्ज की गई है। गेहूं का भाव 29 रुपये प्रति क्विंटल घटकर 2,838 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। इसी तरह गेहूं से तैयार होने वाले आटे के दाम में भी 30 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई है। हालांकि, चावल की कीमतों में तेजी ने इस राहत को कुछ हद तक कम कर दिया। औसत गुणवत्ता वाले चावल का भाव 62 रुपये प्रति क्विंटल बढ़कर 4,117 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। यानी अनाज बाजार में जहां गेहूं और आटे ने राहत दी है, वहीं चावल की बढ़ती कीमत ग्राहकों की चिंता बढ़ा सकती है।
तेलों के भाव गिरे
खाद्य तेलों के बाजार में भी उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिले संकेतों का असर घरेलू बाजार पर पड़ा और अधिकांश प्रमुख खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। पाम ऑयल 145 रुपये प्रति क्विंटल सस्ता हुआ है। मूंगफली तेल के भाव में 106 रुपये प्रति क्विंटल की कमी आई। इसके अलावा वनस्पति तेल 55 रुपये, सूरजमुखी तेल 48 रुपये और सरसों तेल 42 रुपये प्रति क्विंटल तक सस्ता हुआ है। रोजमर्रा की रसोई में इस्तेमाल होने वाले इन तेलों के दाम घटने से घरेलू खर्च में कुछ राहत मिल सकती है।
दालों में मिला-जुला असर
दालों के बाजार में कीमतों का रुख एक जैसा नहीं रहा। मूंग दाल के भाव में 20 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई है। दूसरी तरफ मसूर, उड़द, तुअर और चना दाल महंगी हुई हैं। मसूर दाल की कीमत 41 रुपये, उड़द दाल 29 रुपये, तुअर दाल 16 रुपये और चना दाल 12 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गई। ऐसे में खाद्य वस्तुओं के बाजार में फिलहाल मिलाजुला रुख देखने को मिल रहा है। चीनी, गुड़, गेहूं और अधिकांश खाद्य तेलों की कीमत घटने से राहत जरूर मिली है, लेकिन चावल और कुछ प्रमुख दालों की तेजी घरेलू बजट पर दबाव बनाए रख सकती है।










