sugar import in India: देश में चीनी की कीमतों में अचानक आई गिरावट ने आयात का पूरा गणित बदल दिया है। उद्योग जगत के अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय चीनी मिलें और रिफाइनरी सरकार की मंजूरी के बावजूद 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी का पूरा आयात शायद नहीं करेंगी। घरेलू बाजार में भाव गिरने से विदेश से चीनी मंगाने पर मुनाफा काफी कम हो गया है।
आयात हुआ कम आकर्षक
रॉयटर्स के मुताबिक, मुंबई स्थित व्यापारी MEIR Commodities India के MD राहिल शेख ने बताया कि पिछले सप्ताह बढ़ती कीमतों के बीच चीनी का आयात मिल मालिकों के लिए फायदेमंद दिखाई दे रहा था। लेकिन सरकार की घोषणा के बाद घरेलू कीमतों में तेज गिरावट आई और अब आयात में पहले जैसी दिलचस्पी नहीं रही। उनका कहना है कि आयात से मिलने वाला मुनाफा बेहद सीमित है और करीब दो महीने बाद माल पहुंचने तक यह मुनाफा बना रहेगा, इसकी भी कोई गारंटी नहीं है।
आधा रह सकता आयात
केंद्र सरकार ने Tariff Rate Quota यानी TRQ के तहत 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री आयात को मंजूरी दी है। इसकी बड़ी खेप ब्राजील से आने की संभावना है। ब्राजील से भारत तक चीनी पहुंचने में करीब 40 दिन लग सकते हैं। राहिल शेख समेत वैश्विक व्यापारिक घरानों के चार अन्य डीलरों का अनुमान है कि वास्तविक आयात करीब 5 लाख टन तक ही सीमित रह सकता है।
घरेलू भाव गिरे
24 अगस्त को देश में चीनी का औसत थोक भाव करीब 58.29 रुपये प्रति किलो और खुदरा भाव 63.05 रुपये प्रति किलो बताया गया। इससे पहले खुदरा कीमतें लगभग 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थीं। रिपोर्टों के अनुसार रक्षाबंधन से पहले मिलों में चीनी के दाम में करीब 20 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली। ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने भी कहा था कि आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों में और कमी आ सकती है।
कमी नहीं होने का दावा
चीनी की मांग और सप्लाई को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और ISMA ने साफ किया है कि देश में चीनी की कमी नहीं है। त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग और कीमतों में हुई तेज वृद्धि को देखते हुए सरकार ने आयात की अनुमति दी थी। लेकिन अब घरेलू कीमतों में गिरावट और मिलों में समय से पहले क्रशिंग शुरू होने की संभावना के कारण आयात का आंकड़ा आधा रह सकता है।








