Jefferies Market Warning: पीस डील की खबर के बाद भले ही भारतीय शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली और पिछले तीन कारोबारी दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी करीब 4 प्रतिशत तक बढ़े हैं, लेकिन यह तेजी ज्यादा समय तक टिकेगी या नहीं, इसको लेकर सवाल उठने लगे हैं। दिग्गज ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की एक नई रिपोर्ट ने बाजार में हलचल पैदा कर दी है। रिपोर्ट में करीब 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश को लेकर बड़ी बात कही गई है। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs की लगातार बिकवाली के बाद भी भारतीय बाजार को घरेलू निवेशकों का सहारा मिल रहा है, लेकिन जेफरीज की रिपोर्ट ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
विदेशी फंड्स का बदला रुख
जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि दुनिया के कई बड़े फंड्स जो उभरते बाजारों पर नजर रखते हैं, वे इस समय भारत के शेयर बाजार को लेकर कम उत्साहित हैं. इन फंड्स ने भारतीय बाजार में अपने निवेश को बेंचमार्क के मुकाबले कम कर रखा है. इसे बाजार की भाषा में ‘अंडरवेट’ स्थिति कहा जाता है।
70 बड़े फंड्स का किया अध्ययन
जेफरीज ने मार्च 2026 तक के आंकड़ों के आधार पर दुनिया के 70 बड़े इमर्जिंग मार्केट फंड्स के पोर्टफोलियो का अध्ययन किया. इन सभी फंड्स के पास करीब 320 बिलियन डॉलर यानी लगभग 30 लाख करोड़ रुपये की बड़ी पूंजी है। रिपोर्ट के अनुसार, इन बड़े फंड्स में से करीब 61 प्रतिशत विदेशी निवेशक भारत को लेकर अंडरवेट स्थिति में हैं। इसका मतलब है कि ये निवेशक भारतीय शेयर बाजार में उतना पैसा नहीं लगा रहे हैं, जितना आमतौर पर उनके बेंचमार्क इंडेक्स के हिसाब से होना चाहिए
10 साल का बदला ट्रेंड
अगर पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों को देखें तो विदेशी फंड्स भारत के बाजार को लेकर ज्यादातर समय ओवरवेट रहे हैं। यानी वे बेंचमार्क के मुकाबले भारतीय बाजार में ज्यादा निवेश रखते थे. आमतौर पर यह निवेश 2 से 3 प्रतिशत अंक ज्यादा रहता था।
निवेशकों की बढ़ी चिंता
अब स्थिति बदलती हुई नजर आ रही है. विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ना भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय बन सकता है। हालांकि घरेलू निवेशक बाजार को संभालने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन विदेशी फंड्स की रणनीति आने वाले समय में बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती है।
बाजार पर रहेगी नजर
जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी, अगर विदेशी फंड्स का रुख फिर से सकारात्मक होता है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है, लेकिन लगातार बिकवाली दबाव बढ़ा सकती है।









