Life Inside the Iron Lung: अमेरिका के टेक्सास में रहने वाले पॉल अलेक्जेंडर की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। उनकी जिंदगी लोगों को भावुक भी कर रही है और प्रेरणा भी दे रही है। पॉल का जन्म 30 जनवरी 1946 को हुआ था। जब वह सिर्फ 6 साल के थे, तब पोलियो महामारी ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। इस बीमारी की वजह से उनके गले के नीचे पूरा शरीर लकवाग्रस्त हो गया। यहां तक कि उन्हें सांस लेने में भी परेशानी होने लगी। डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने के लिए उन्हें ‘आयरन लंग’ नाम की मशीन में रखा। यह एक बड़ी लोहे की मशीन थी, जो उनके शरीर को पूरी तरह ढक लेती थी और सिर्फ सिर बाहर रहता था।
मशीन के सहारे चली सांसें
आयरन लंग मशीन हवा के दबाव से फेफड़ों को सांस लेने में मदद करती थी। पॉल कई सालों तक इसी मशीन के अंदर रहे। बताया जाता है कि शुरुआती 10 साल तक वह मशीन से बाहर नहीं निकल पाए। लेकिन इतनी मुश्किलों के बाद भी उन्होंने जिंदगी से हार नहीं मानी। उन्होंने ‘फ्रॉग ब्रीदिंग’ नाम की खास तकनीक सीखी। इस तकनीक से वह अपने गले की मदद से फेफड़ों में हवा भर पाते थे। इसी वजह से वह थोड़े समय के लिए मशीन से बाहर भी रह लेते थे।
पढ़ाई और वकालत में हासिल की सफलता
पॉल ने अपनी पढ़ाई कभी नहीं छोड़ी। उन्होंने साउदर्न मेथोडिस्ट यूनिवर्सिटी में शिक्षा हासिल की। इसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास से बैचलर और लॉ की डिग्री पूरी की। साल 1986 में वह आधिकारिक तौर पर वकील बने। उन्होंने कई लोगों के केस लड़े और जरूरतमंदों की मदद की। इतना ही नहीं, उन्होंने “Three Minutes for a Dog” नाम की किताब भी लिखी। पॉल मुंह में ब्रश पकड़कर पेंटिंग भी बनाते थे।
सोशल मीडिया पर बने प्रेरणा
सोशल मीडिया पर लोग उन्हें ‘पोलियो पॉल’ और ‘मैन इन द आयरन लंग’ के नाम से जानते थे। उनकी जिंदगी की कहानी दुनिया भर में लाखों लोगों तक पहुंची। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड ने उन्हें सबसे लंबे समय तक आयरन लंग में रहने वाले व्यक्ति के रूप में मान्यता दी। 11 मार्च 2024 को 78 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। बताया गया कि इससे पहले वह कोविड-19 से भी संक्रमित हुए थे। उनकी मौत के बाद ही उनके शरीर को आयरन लंग मशीन से बाहर निकाला गया।
दुनिया को दे गए बड़ा संदेश
पॉल अलेक्जेंडर की जिंदगी यह साबित करती है कि इंसान का हौसला किसी भी मुश्किल से बड़ा होता है। शारीरिक कमजोरी के बावजूद उन्होंने जिंदगी को खुलकर जिया। वह घूमते थे, लोगों से मिलते थे और हमेशा एक्टिव रहने की कोशिश करते थे।
आज पोलियो वैक्सीन की वजह से आयरन लंग जैसी मशीनों की जरूरत लगभग खत्म हो चुकी है। पॉल उन आखिरी लोगों में शामिल थे, जो इस मशीन के सहारे जिंदगी जी रहे थे। उनकी कहानी आज भी लोगों को संघर्ष और उम्मीद का संदेश दे रही है।


