Big Relief For Foreign Investors: वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक चुनौतियों और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को राहत देते हुए भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश पर लगने वाले कैपिटल गेन्स टैक्स को पूरी तरह समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस कदम का उद्देश्य भारत में विदेशी निवेश बढ़ाना, रुपये को मजबूती देना और मौजूदा वैश्विक आर्थिक दबावों से देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखना है।
कैबिनेट ने दी मंजूरी
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। सरकार चाहती है कि विदेशी निवेशक भारतीय बॉन्ड बाजार में अधिक निवेश करें, जिससे देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय हालात और बाजार की अनिश्चितता के कारण कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बना हुआ है।
अध्यादेश के जरिए होगा लागू
सरकार ने इस बदलाव को जल्दी लागू करने के लिए आयकर कानून में संशोधन संबंधी अध्यादेश को भी मंजूरी दी है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह नया नियम प्रभावी हो जाएगा।
इस फैसले को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल के महीनों में भारतीय बाजार से विदेशी निवेश की निकासी बढ़ी है। साथ ही रुपये पर भी दबाव बना हुआ है।
विदेशी निवेशकों को क्या फायदा मिलेगा
नए नियम के तहत अब सरकारी बॉन्ड को 12 महीने से अधिक समय तक रखने पर लगने वाला 12.5 प्रतिशत लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।
इसके अलावा सरकारी प्रतिभूतियों से मिलने वाले ब्याज पर लगने वाले टैक्स को कम करने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। इससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बॉन्ड बाजार पहले की तुलना में अधिक आकर्षक बन सकता है।
क्यों जरूरी था यह कदम
साल 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से बड़ी मात्रा में पैसा निकाला है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस वर्ष अब तक करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे जा चुके हैं।
इसका असर भारतीय रुपये और बाजार की नकदी व्यवस्था पर भी पड़ा है। सरकार को उम्मीद है कि टैक्स में राहत मिलने के बाद विदेशी निवेशक बॉन्ड बाजार में अधिक निवेश करेंगे, जिससे बाजार में नई पूंजी आएगी और रुपये को भी सहारा मिलेगा।
आगे और सुधारों की उम्मीद
आर्थिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला केवल शुरुआत हो सकता है। आने वाले समय में सरकार विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए और भी कई कदम उठा सकती है।
बाजार की नजर अब इस फैसले की आधिकारिक अधिसूचना और भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी नीतियों पर बनी हुई है। यदि आगे भी निवेशकों के हित में फैसले लिए जाते हैं, तो भारतीय वित्तीय बाजार को इसका सकारात्मक लाभ मिल सकता है।

