सप्ताह की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी खराब रही। सोमवार को बाजार खुलते ही भारी बिकवाली देखने को मिली। इसका असर मुंबई शेयर बाजार यानी बीएसई और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज दोनों पर साफ नजर आया। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 1000 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 50 भी लाल निशान में कारोबार करता दिखाई दिया।
बाजार में आई इस बड़ी गिरावट से निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। कुछ ही मिनटों में निवेशकों के करीब 4 लाख करोड़ रुपये डूब गए। सुबह करीब 9 बजकर 54 मिनट पर सेंसेक्स 1058 अंक टूटकर 76,269.42 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। उस समय बाजार में करीब 1.37 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार की चिंता का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है। खासतौर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
अमेरिका-ईरान तनाव बना बड़ी वजह
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। खबरों के मुताबिक, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर बातचीत आगे नहीं बढ़ती तो अमेरिका ईरान के खिलाफ ज्यादा सख्त कदम उठा सकता है। इस खबर से दुनियाभर के बाजारों में डर का माहौल बन गया, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया।
सोने से जुड़ी कंपनियों के शेयर टूटे
सोने और ज्वेलरी सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। Titan और Senco Gold जैसे शेयरों में करीब 9 फीसदी तक की कमजोरी दर्ज की गई।
बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान के बाद निवेशकों ने इन शेयरों में बिकवाली बढ़ा दी। प्रधानमंत्री ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लोगों से फिलहाल सोने की खरीदारी और विदेश यात्रा टालने की अपील की थी। इसके बाद बाजार में इसका असर दिखा।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
इधर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 3.5 फीसदी बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की वजह से तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से बाजार में दबाव बढ़ गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक हालात के अनुसार बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।





