Cockroach Row : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने संगठन के नाम को लेकर पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जब इस अभियान की शुरुआत की गई थी, तब इसका मकसद केवल छात्रों और युवाओं की समस्याओं को सामने लाना था। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि यह पहल इतनी तेजी से आगे बढ़ेगी और देशभर में लोगों का समर्थन हासिल करेगी। अभिजीत ने कहा कि उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि यह सोशल मीडिया से शुरू हुआ अभियान एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले लेगा। उन्होंने स्वीकार किया कि अगर पहले से इसकी लोकप्रियता का अनुमान होता, तो संगठन के नाम में ‘कॉकरोच’ के साथ ‘पार्टी’ शब्द नहीं जोड़ा जाता। उनका कहना है कि नाम से ज्यादा अहम वह उद्देश्य था, जिसके लिए यह अभियान शुरू किया गया।
विवाद के बाद रखी अपनी बात
अभिजीत दीपके ने बताया कि संगठन का नाम एक प्रतीक और व्यंग्य के तौर पर चुना गया था। इसका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल की तरह काम करना नहीं था, बल्कि व्यवस्था से जुड़े सवालों को लोगों के सामने लाना था। हालांकि, समय के साथ इस नाम को लेकर कई तरह की चर्चाएं और विवाद भी सामने आए। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने इसे गलत तरीके से समझा, जबकि उनका मकसद केवल युवाओं की आवाज़ को मजबूत करना था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संगठन का नाम चर्चा में जरूर रहा, लेकिन उसका मूल उद्देश्य हमेशा सामाजिक मुद्दों पर लोगों को जोड़ना रहा है।
छात्र आंदोलन से मिली पहचान
अभिजीत के अनुसार, शिक्षा व्यवस्था, छात्रों की समस्याओं और युवाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों ने इस अभियान को नई पहचान दिलाई। शुरुआत सोशल मीडिया से हुई, लेकिन धीरे-धीरे यह आंदोलन कई राज्यों तक पहुंच गया। बड़ी संख्या में छात्रों और युवाओं ने इसमें भाग लिया और अपनी मांगों को लेकर आवाज़ उठाई। इसी वजह से यह अभियान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। अभिजीत का कहना है कि लोगों का भरोसा और समर्थन ही इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत बना, जिसने इसे लगातार आगे बढ़ाया।
राजनीति में आने से किया इनकार
अभिजीत दीपके ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य चुनाव लड़ना या किसी राजनीतिक दल की तरह सत्ता हासिल करना नहीं है। उनका पूरा ध्यान सामाजिक मुद्दों, शिक्षा और युवाओं की समस्याओं पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में संगठन कोई बड़ा फैसला लेता है, तो वह सामूहिक चर्चा और साथियों की राय के आधार पर होगा। फिलहाल उनकी प्राथमिकता आंदोलन को सही दिशा में आगे बढ़ाना और लोगों के भरोसे को कायम रखना है।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
अभिजीत ने कहा कि आंदोलन का एक चरण पूरा होने का मतलब यह नहीं है कि उनकी लड़ाई खत्म हो गई है। उन्होंने अपने समर्थकों से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की। उनका कहना है कि किसी भी आंदोलन की असली ताकत उसका उद्देश्य और उससे जुड़े लोगों का विश्वास होता है, न कि केवल उसका नाम। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में भी संगठन छात्रों और युवाओं के हितों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाता रहेगा। साथ ही उन्होंने दोहराया कि अगर उन्हें पहले इस आंदोलन के इतने बड़े स्वरूप का अंदाजा होता, तो वह संगठन के नाम को लेकर अलग फैसला लेते।









