Parliament Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार से हो रही है और पहले दिन से ही सदन में तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है। सत्र शुरू होने से पहले रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें सरकार ने सभी राजनीतिक दलों से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में सहयोग की अपील की। हालांकि विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया कि वह कई अहम मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति के साथ सदन में उतरेगा। माना जा रहा है कि यह सत्र राजनीतिक और विधायी दोनों दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण रहेगा।
विपक्ष की रणनीति पहले ही तैयार
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि वे राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोप, एफसीआरए संशोधन विधेयक, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में प्रस्तावित बदलाव और परिसीमन जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेंगे। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश पहले ही इन प्रस्तावों का विरोध करने की बात कह चुके हैं। संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी दलों ने अलग बैठक कर संयुक्त रणनीति भी तैयार की।
‘वन्दे मातरम्’ से जुड़े विधेयक होगी चर्चा
सरकार राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जिसमें ‘वन्दे मातरम्’ का अपमान करने या इसके गायन में बाधा डालने को आपराधिक अपराध घोषित करने का प्रस्ताव है। विधेयक के अनुसार दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान रखा गया है। दूसरी ओर, डीएमके ने परिसीमन के मुद्दे पर दक्षिणी राज्यों के हितों की रक्षा की मांग उठाई। पार्टी ने कहा कि यदि प्रस्ताव दक्षिण भारत के हितों को प्रभावित करता है तो वह इसका विरोध करेगी और परिसीमन पर 25 वर्ष तक रोक बढ़ाने की मांग करेगी।
राम मंदिर दान का मुद्दा भी रहेगा चर्चा में
सर्वदलीय बैठक के दौरान कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की। इसके अलावा विपक्ष सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन, उनके साथ हुई पुलिस कार्रवाई तथा नीट और सीबीएसई से जुड़े छात्र आंदोलनों का मुद्दा भी उठाने की तैयारी में है। विपक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को भी प्रमुखता से उठाने का संकेत दे चुका है।
एनसीपीआई को लेकर वॉकआउट
सर्वदलीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों के नए समूह एनसीपीआई को बुलाए जाने का विपक्ष ने विरोध किया। इसी मुद्दे पर विपक्षी दलों ने कुछ समय के लिए बैठक से प्रतीकात्मक वॉकआउट किया, हालांकि बाद में वे फिर शामिल हो गए। उधर, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी दलों से सार्थक चर्चा के बाद विधेयकों को पारित कराने की अपील की। वहीं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बिजनेस एडवाइजरी कमिटी की बैठक में सभी दलों से जनहित के मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा और सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग देने का आग्रह किया।









