Galgotias University Controversy: हाल ही में Galgotias University फिर सुर्खियों में आ गई है। देश-दुनिया में चर्चा में आई इस यूनिवर्सिटी को लेकर अब पेटेंट से जुड़ी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि यूनिवर्सिटी ने बड़ी संख्या में पेटेंट फाइल कर करोड़ों रुपये कमाए हैं। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद शिक्षा और शोध की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
रिकॉर्ड संख्या में पेटेंट फाइल
रिपोर्ट के अनुसार, गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अब तक 1089 पेटेंट फाइल किए हैं। यह संख्या देश के बड़े तकनीकी संस्थानों से भी ज्यादा बताई जा रही है।
अगर तुलना की जाए तो सभी Indian Institutes of Technology यानी आईआईटी ने मिलकर करीब 803 पेटेंट फाइल किए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर एक निजी यूनिवर्सिटी इतनी बड़ी संख्या में पेटेंट कैसे हासिल कर रही है।
जमीनी असर पर सवाल
आलोचकों का कहना है कि इतने पेटेंट होने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई बड़ा बदलाव या नया आविष्कार दिखाई नहीं दे रहा है।
लोगों का कहना है कि अगर इतने इनोवेशन हुए हैं तो उनका फायदा समाज या उद्योग जगत में नजर क्यों नहीं आता। यही वजह है कि अब पेटेंट से होने वाली कमाई पर भी चर्चा तेज हो गई है।
एआई समिट में रोबोडॉग विवाद
भारत मंडपम में हुए एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में यूनिवर्सिटी ने एक चीनी रोबोडॉग प्रदर्शित किया था। शुरुआत में इसे यूनिवर्सिटी का अपना इनोवेशन बताया गया, लेकिन बाद में यह दावा गलत साबित हुआ। इस घटना के बाद यूनिवर्सिटी को काफी आलोचना झेलनी पड़ी। सोशल मीडिया पर भी इस मामले ने तूल पकड़ लिया और लोग सवाल उठाने लगे।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
इस पूरे विवाद पर विपक्ष ने भी सरकार को निशाने पर लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पवन खेड़ा और जयराम रमेश समेत कई नेताओं ने इस मुद्दे को उठाया।
विपक्ष का कहना है कि ऐसे संस्थान को सरकारी मंच देना और प्रमोट करना गलत है। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले की जांच की मांग भी की है।
यूनिवर्सिटी ने दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद यूनिवर्सिटी की ओर से प्रेस रिलीज जारी कर सफाई देने की कोशिश की गई। हालांकि अभी तक यूनिवर्सिटी खुलकर मीडिया के सामने नहीं आई है। इस पूरे मामले ने शिक्षा जगत में पेटेंट, इनोवेशन और पारदर्शिता को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।








